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कर्ज के बोझ से दबी सरकार ने अनावश्यक खर्च में कटौती करने की सभी विभागों को दी सूचना

– जिला परिषद पर कोई असर नहीं

– निधि का अभाव : ठेकेदारों ने बिल बकाया रहने से काम बंद कर दिए

नागपुर :- राज्य सरकार कर्ज के बोझ में दबी है। अनावश्यक खर्च में कटौती करने की सभी विविध विभागों को सूचना दी गई है, लेकिन जिला परिषद में सरकार की सूचना का कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। जिला परिषद का अपने खर्च पर नियंत्रण नहीं है। हाल में हुई कर्मचारी क्रीड़ा व सांस्कृतिक स्पर्धा के आयोजन पर 25 लाख से ज्यादा खर्च हुआ। जिप के बजट में 20 लाख रुपए का प्रावधान था, इसलिए दानदाताओं से दान स्वीकृत कर खर्च किया गया। दानदाता से 5 लाख और जिप बजट से प्राप्त 20 लाख रुपए खर्च किए गए। इससे साफ है कि सरकार कुछ भी कहे, जिला परिषद का खर्च पर नियंत्रण नहीं है।

जिला परिषद के साढ़े आठ हजार कर्मचारी हैं। उनके लिए साल में एक बार क्रीड़ा व सांस्कृतिक स्पर्धा का आयोजन किया जाता है। कुछ साल पहले बजट में 3 लाख रुपए का प्रावधान किया जाता था। जिला परिषद में जनप्रतिनिधि नहीं हैं, इसलिए मौके का फायदा उठाकर प्रशासक ने 13 लाख रुपए बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर दिया। फरवरी 17 से 19 के दरमियान कर्मचारियों की खेल व सांस्कृतिक स्पर्धा का आयोजन किया गया।

जिला परिषद के साढ़े आठ हजार कर्मचारी हैं। उनके लिए साल में एक बार क्रीड़ा व सांस्कृतिक स्पर्धा का आयोजन किया जाता है। कुछ साल पहले बजट में 3 लाख रुपए का प्रावधान किया जाता था। जिला परिषद में जनप्रतिनिधि नहीं हैं, इसलिए मौके का फायदा उठाकर प्रशासक ने 13 लाख रुपए बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर दिया। फरवरी 17 से 19 के दरमियान कर्मचारियों की खेल व सांस्कृतिक स्पर्धा का आयोजन किया गया।

व्यक्तिगत लाभ की योजनाएं लड़खड़ाई

जिला परिषद के माध्यम से व्यक्तिगत लाभ की विविध सरकारी योजनाएं चलाई जाती हैं। साल भर पहले जिला परिषद का कार्यकाल समाप्त हो जाने से जनप्रतिनिधि का नियंत्रण नहीं रहा। प्रशासन की मनामनी से व्यक्तिगत लाभ की योजनाएं लड़खड़ा गई हैं। जिला परिषद परिसर में केवल ठेकेदारों की चहल-पहल नजर आती है। आम इंसान का जिला परिषद से संपर्क टूट सा गया है। व्यक्तिगत लाभ की योजनाएं केवल कागजों पर सिमटकर रह गई हैं। जिला परिषद के विविध काम ठेकेदारों के माध्यम से किए जाते हैं। निधि के अभाव में ठेकेदारों के बिल बकाया रहने से काम बंद कर दिए गए हैं। वहीं विभाग प्रमुखों के कक्ष चमकाने पर लाखों रुपए खर्च किए गए। उनके बिल भी अदा किए जाने की सूत्रों से जानकारी मिली।


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