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एलपीजी सिलेंडर की कमी से स्कूली पोषण योजना प्रभावित, कई रसोई बंद होने की कगार पर

– सरकारी स्कूलों के मध्याह्न भोजन पर संकट, सिलेंडर की कमी से व्यवस्था चरमराई

– छात्रों के थाली से अंडे और केले गायब, पोषण आहार में हुआ बड़ा बदलाव

– 2711 स्कूलों में पोषण योजना पर असर, विभाग को ही नहीं स्थिति की जानकारी

नागपुर :- पिछले कुछ वर्षों से सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार घट रही है और निजी स्कूलों की ओर रुझान बढ़ रहा है. छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ पौष्टिक भोजन भी उपलब्ध करा रही है. जिले के 2711 स्कूलों में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है और 2०47 स्कूलों में गैस पर खाना पकाया जा रहा है. हालांकि, देश भर में सिलेंडरों की कमी के कारण व्यावसायिक सिलेंडरों पर प्रतिबंध लगा हुआ है. स्कूलों में पौष्टिक भोजन पर इसके प्रभाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. हालांकि, विभाग के पास भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि स्कूलों में वर्तमान स्थिति क्या है. ऐसा प्रतीत होता है कि इसे इसकी जानकारी नहीं थी. परिणामस्वरूप, यह कहना उचित होगा कि स्कूली पोषण व्यवस्था चरमरा गई है.

प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत, शैक्षणिक वर्ष 2०25-26 में राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक की शिक्षा उपलब्ध कराया जाता है. स्कूली शिक्षा विभाग द्वारा चलाई जा रही पोषण आहार योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को अधिक स्वास्थ्यवर्धक और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. जिले के 2 लाख 78 हजार 67 विद्यार्थी इस पौष्टिक भोजन का लाभ उठा रहे हैं. पहले इन विद्यालयों में चूल्हों पर पौष्टिक भोजन तैयार किया जाता था, जिससे प्रदूषण की समस्या थी. इसलिए जिला परिषद ने ‘धूआं मुक्त स्कूल’ अभियान चलाया और 2०47 स्कूलोंं को सिलेंडर उपलब्ध कराए. हालांकि, पश्चिम एशिया (इजराइल-ईरान-अमेरिका) में युद्ध जैसी स्थिति के कारण ईंधन आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो गई है. इसके परिणामस्वरूप कच्चे माल की उपलब्धता कम हो गई है.

आयात प्रभावित हुआ है. परिणामस्वरूप, महाराष्ट्र समेत पूरे देश में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी हो गई है और इसका असर स्कूली पोषण योजना पर भी पड़ रहा है. इस कमी के कारण जिले के छात्रों के मध्याह्न भोजन पर भी असर पड़ रहा है. व्यावसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने से भोजन पकाने वाले संस्थानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. जिससे समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं. कुछ स्कूलों की रसोई बंद होने की कगार पर हैं. हालांकि, इस संबंध में विभाग द्वारा कोई योजना न बनाए जाने से एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. जब इस बारे में विभाग की अधिकारी नैना दलवी से बात की, तो वह अपनी ही दुनिया में खोई हुई हैं. परिणामस्वरूप, उनकी कार्य प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग गया है. पिछले वर्ष, विद्यार्थियों को उनके पौष्टिक आहार में अंडे, केले, खिचड़ी और खीर दी जाती थी. इसके अतिरिक्त, हर बुधवार को अंडा पुलाव परोसा जाता था. वहीं, शाकाहारी विद्यार्थियों को खीर के साथ केले या स्थानीय फल और खिचड़ी दी जाती थी. नए शैक्षणिक सत्र में, विद्यालय के पौष्टिक आहार में पुलाव, खिचड़ी, मसाले और चावल पर अधिक जोर दिया गया है, और अंडा पुलाव और खीर विद्यार्थियों केआहार से हटा दिए गए हैं.


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