– घाट खत्म, खेल शुरू? कुछ घाटो की अवधि खत्म होते ही,बची रॉयल्टी का रिफंड लेने की साजिश की आशंका!
नागपुर :- हाल ही में नागपुर, भंडारा, गोंदिया और चंद्रपुर जिलों के रेती घाटों का लिलाव संपन्न हुआ है। लिलाव के बाद से ही कुछ घाटों को लेकर कई तरह की चर्चाएं और आरोप सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ घाटों पर एक ही रॉयल्टी पर कई-कई ट्रिप रेती निकाली जा रही है, जबकि 3 ब्रास की रॉयल्टी पर 5 से 8 ब्रास तक रेती से भरे ओवरलोड ट्रक नागपुर शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से पहुंचाई जा रही है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस पूरे मामले में कुछ प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों की भी प्रत्यक्ष भूमिका होने की चर्चा है। विशेष रूप से “अज्जू” नामक एक व्यक्ति का नाम विदर्भ क्षेत्र में प्रभावशाली तौर पर सामने आ रहा है, जिसे कथित तौर पर कुछ बड़े नेताओं का करीबी बताया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक एक रॉयल्टी पर कई ट्रिप मारने का एक कथित “फॉर्मूला” भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि जब घाट की अवधि समाप्ति होगी और यदि बड़ी मात्रा में रॉयल्टी शेष रह जाएगी, तो उस बची हुई रॉयल्टी का सरकार से रिफंड दिलाने में पूरी ताकत लगाकर सरकार की तिजोरी से खजाने लूटने की साजिश की आशंका है? जबकि नियमों के अनुसार जिस घाट से अवैध रेती का परिवहन किया जाता है , उस घाट संचालक के खिलाफ तत्काल जांच और एफआईआर दर्ज करना आवश्यक माना जाता है। हालांकि, ऐसे कदम उठाए जाने के मामले कम ही देखने को मिल रहे हैं। अगर पिछले एक महीने के नागपुर शहर के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है। खासकर उमरेड रोड, भंडारा रोड, हुडकेश्वर रिंग रोड, कामठी रोड, कोराडी रोड और हिंगना चौक जैसे प्रमुख मार्गों पर रात-दिन दौड़ते रेती से भरे ट्रक आसानी से दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में जरूरत है कि संबंधित विभाग इस पूरे मामले का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए जांच करें और यदि कहीं भी नियमों का उल्लंघन या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि पर समय रहते रोक लगाई जा सके। पूरे मामले को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यह विषय गंभीरता से जांच का पात्र है। यदि समय रहते पारदर्शी जांच और निगरानी की व्यवस्था नहीं की गई, तो भविष्य में सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री की पहल सराहनीय, उनकी अथक मेहनत पर फिरेगा पानी? सरकारी तिजोरी पर होगी रिफंड की हानि?
एक ओर जहां राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस राज्य में कानून व्यवस्था सुधारने और नए करारों के माध्यम से राज्य के आर्थिक विकास को गति देने में जुटे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ तत्वों द्वारा कथित तौर पर सरकारी तिजोरी से बची हुई रॉयल्टी और नुकसान भरपाई के नाम पर रिफंड का लाभ लेने की साजिश अभी से शुरू होने की चर्चा चल रही है। जहां एक तरफ अनेक वर्षों से कई विभागों जैसे पीडब्ल्यूडी आदि के ठेकेदारों के भुगतान अभी तक लंबित हैं, वहीं इस प्रकार की योजना बनाकर सरकारी तिजोरी लूटने की साजिश जा रही है? यदि इन कथित रास्तों से सरकारी खजाने पर बोझ डालने की कोशिश होती है तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है। इन चर्चाओं पर अंकुश लगाने के लिए सजग नागरिकों द्वारा मांग उठ रही है कि इस पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और संबंधित विभागों द्वारा सख्त जांच कराई जाए। यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता या साजिश सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में सरकारी तिजोरी को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों पर समय रहते अंकुश लगाया जा सके। ऐसे में आवश्यक है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दें और भविष्य में बची हुई रॉयल्टी दिखाकर सरकार की तिजोरी पर हाथ साफ करने की किसी भी संभावित कोशिश पर अभी से नकेल कसें।
अभी से बनाई जा रही रिफंड की योजना?
सूत्रों के अनुसार, कुछ रेती घाटों पर रॉयल्टी प्रणाली के दुरुपयोग की आशंकाएं जताई जा रही हैं। चर्चा है कि एक ही रॉयल्टी पर एक से अधिक ट्रिप निकाले जा रहे हैं, वहीं निर्धारित 3 ब्रास की रॉयल्टी पर अधिक मात्रा में रेत परिवहन किए जाने के भी आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि इस तरह की गतिविधियां भविष्य में बची हुई रॉयल्टी को आधार बनाकर रिफंड की मांग करने की साजिश अभी से की जा रही है । आशंका जताई जा रही है कि घाटों की अवधि समाप्त होने के बाद संबंधित पक्ष यह दावा कर सकते हैं कि विभिन्न कारणों से निर्धारित रेत का उठाव नहीं हो सका, जिसके चलते बची हेई रॉयल्टी की रक्कम रिफंड के मांग की की जाए। हालांकि, इन सभी दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित सरकार एवं विभाग समय रहते पूरे प्रकरण की जांच करे, ताकि किसी भी प्रकार की संभावित अनियमितता या राजस्व नुकसान की स्थिति को रोका जा सके।
महसूल मंत्री भी दें विशेष ध्यान
महसूल विभाग की तिजोरी पर अभी से नजर? बची हुई रॉयल्टी के रिफंड को लेकर अभी से साजिश शुरू?
सूत्रों में यह भी चर्चा है कि यदि समय रहते इस पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच नहीं हुई तो महसूल विभाग को आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसलिए महसूल मंत्री को भी इस विषय पर विशेष ध्यान देते हुए संबंधित अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश देना आवश्यक बताया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने की कोशिश पर समय रहते रोक लगाई जा सके।
विदर्भ में प्रभावशाली ‘अज्जू’ की भूमिका पर चर्चा तेज!
विदर्भ क्षेत्र में रेती घाटों को लेकर एक बार फिर प्रभावशाली हस्तियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। खास तौर पर “अज्जू” नामक एक व्यक्ति का नाम तेजी से चर्चा में है, जिसे कथित तौर पर कुछ बड़े राजनीतिक नेताओं का करीबी बताया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि इन क्षेत्र के कई रेती घाटों पर उसी का प्रभाव दिखाई देता है।
सूत्रों के अनुसार, उसके नाम का असर इतना है कि अधिकारी भी कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं। चर्चा है कि किसी भी कठोर कदम से बचने के पीछे राजनीतिक दबाव और संभावित ट्रांसफर या कार्रवाई का डर काम कर रहा है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पूरे मामले ने प्रशासनिक निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।