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आरक्षण के टुकड़े कर जातियों में फूट डालने की साजिश – विधायक राजकुमार बडोले

– गोंदिया में उपवर्गीकरण के खिलाफ जोरदार विरोध

– बदर कमेटी की रिपोर्ट की सार्वजनिक होली

– मुख्यमंत्रियों को तहसीलदारों के माध्यम से ज्ञापन

यासीन शेख गोंदिया :-  २५ अप्रैल – डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने हजारों वर्षों की गुलामी की बेड़ियाँ तोड़ी थीं और बहुजन समाज को एकजुट किया था। अब उसी स्वप्न को तोड़ने का प्रयास उपवर्गीकरण के जरिए किया जा रहा है। यह समाज में फूट डालने की साजिश है, जिसे हर हाल में विफल करना होगा, ऐसा आह्वान माजी सामाजिक न्याय मंत्री आ. राजकुमार बडोले ने किया।

राजकुमार बडोले ने कहा – “यह एक साजिश है”

आ. राजकुमार बडोले ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने संविधान के अनुच्छेद ३४१ के तहत अनुसूचित जातियों को एकजुट किया था और उन्हें आरक्षण का अधिकार दिया था। अब सरकार उन अधिकारों को टुकड़ों में बाँटने का प्रयास कर रही है, जिससे समाज में भाई-भाई के बीच भेदभाव उत्पन्न हो। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार का उद्देश्य सिर्फ बहुजन समाज की शक्ति को समाप्त करना है।

गोंदिया में विशाल विरोध प्रदर्शन

गोंदिया में २५ अप्रैल को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर चौक पर उपवर्गीकरण के खिलाफ विशाल धरना प्रदर्शन किया गया। ४४ डिग्री सेल्सियस की चिलचिलाती धूप में हजारों महिलाएँ और पुरुष इस आंदोलन में शामिल हुए। आंदोलन में २०,००० से ज्यादा लोग शामिल हुए। इस दौरान आ. बडोले ने डॉ. आंबेडकर और अन्य महापुरुषों की प्रतिमाओं को माल्यार्पण किया और उनके पुतले को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद मुख्य मार्ग पर एक विराट मोर्चा निकाला गया।

बदर रिपोर्ट की सार्वजनिक होली

आंदोलनकारियों ने न्यायमूर्ति अनंत बदर कमेटी की रिपोर्ट की प्रतीकात्मक होली जलाई और सरकार के निर्णय का विरोध किया। इस विशाल आंदोलन ने महाराष्ट्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

आ. बडोले ने अपने भाषण में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा २०२४ में उपवर्गीकरण के लिए जो आदेश दिया गया, वह संविधान के मूल ढांचे को नुकसान पहुँचाने वाला है। राज्य सरकार ने जो बदर कमेटी बनाई है, उसमें किसी भी अनुसूचित जाति के प्रतिनिधि को स्थान नहीं दिया गया है। इसके अलावा, सरकार के पास जातीय जनगणना के आंकड़े भी नहीं हैं, फिर वह किस आधार पर उपवर्गीकरण करने का निर्णय ले रही है, यह एक बड़ा सवाल है।

उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में महार, बौद्ध, मातंग, चर्मकार, खाटीक, सफाई कर्मचारी जैसे विभिन्न उपजातियों के लिए उपवर्गीकरण से क्या फायदा होगा, यह केवल एक भ्रम पैदा करने जैसा है। सरकार को इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करना चाहिए और संसद में कानून बनाकर इसे रद्द करना चाहिए, अन्यथा यह विरोध पूरे महाराष्ट्र में फैल जाएगा।

आंदोलन में शामिल हुए नेता और कार्यकर्ता

इस आंदोलन में प्रमुख नेता जैसे विधायक विनोद अग्रवाल, अमर वऱ्हाडे, नगरसेवक विजय रबड़े, प्रकाश तांडेकर, ओबीसी नेता सुनिल पटले, पत्रकार भूपेंद्र गणवीर और अन्य कार्यकर्ता भी शामिल हुए। इस आंदोलन के अंत में तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री को विभिन्न मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।

तापमान की चुनौतियाँ भी नहीं थमीं

गोंदिया में ४४ डिग्री सेल्सियस तापमान के बावजूद, हजारों लोग आंदोलन में भाग लेने के लिए सड़कों पर उतरे। स्कूलों की समय सारणी भी बदल दी गई, लेकिन फिर भी लोगों का जोश कम नहीं हुआ और यह आंदोलन साढ़े पाँच घंटे तक चला।

यह विरोध प्रदर्शन महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में भी गूंज सकता है और सरकार के फैसले पर बड़ा दबाव बना सकता है।

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