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जलजीवन और स्वच्छ भारत मिशन कर्मियों को 5 माह से नहीं मिला वेतन

– मानवाधिकार आयोग के आदेशों का भी नहीं हुआ पालन

– मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग, सहपरिवार मुंबई में आंदोलन की चेतावनी

अमरावती :- जिले सहित महाराष्ट्र में जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत कार्यरत संविदा कर्मचारियों को पिछले 5 महीनों से मानधन नहीं मिलने के कारण राज्यभर में भारी नाराजगी देखी जा रही है। इसी के चलते कर्मचारियों ने 20 अप्रैल से राज्यव्यापी असहकार आंदोलन शुरू कर दिया है और मुख्यमंत्री स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, जल जीवन मिशन के कर्मचारियों का लगभग 5 महीने का और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के कर्मचारियों का करीब 3 महीने का वेतन बकाया है। वेतन वितरण बेहद सीमित होने के कारण कर्मचारियों को गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। घर का किराया, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च पूरा करना मुश्किल हो गया है। इस मामले में महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने 12 फरवरी 2026 को बकाया वेतन तुरंत देने के आदेश दिए थे। साथ ही 20 मार्च 2024 के निर्णय के अनुसार नियमितीकरण की प्रक्रिया भी अपेक्षित है। 25 मार्च 2025 को राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी तत्काल वेतन भुगतान के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक इन आदेशों का पालन नहीं हुआ है। कृति समिति के अध्यक्ष रमाकांत गायकवाड़ ने कहा, कर्मचारियों ने राज्य के विकास में अहम योगदान दिया है। इसके बावजूद न्यायालय और मानवाधिकार आयोग के आदेशों का पालन नहीं होना गंभीर

बात है। मुख्यमंत्री को तत्काल हस्तक्षेप कर बकाया वेतन का भुगतान और नियमितीकरण, वेतन वृद्धि तथा आकृतिबंध पर निर्णय लेना चाहिए। यदि वित्त विभाग प्रस्ताव को अस्वीकार करता है, तो कर्मचारियों ने मुंबई में परिवार सहित बड़ा और उग्र आंदोलन करने का निर्णय लिया है।

आंदोलन के बाद भी नहीं सुधरे हालात

जल जीवन और स्वच्छ भारत मिशन कर्मचारियों के योगदान से राज्य में अब तक 38,805 गांव ओडीएफ प्लस और 14,472 गांव हर घर जल के रूप में घोषित किए जा चुके हैं। ग्रामीण स्वच्छता और जल आपूर्ति योजनाओं की सफलता में इन कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कृति समिति के अनुसार, फरवरी 2026 के आंदोलन के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसलिए अब कर्मचारियों ने असहकार आंदोलन के तहत रिपोर्टिंग, बैठकों और वीडियो कॉन्फ्रेंस में भागीदारी सीमित कर दी है। समिति ने चेतावनी दी है कि अब यह आंदोलन और अधिक उया किया जाएगा। साथ ही आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की वेतन कटौती न करने के स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग भी की गई है।

सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बावजूद नहीं लिया निर्णय

वेतन वृद्धि के मुद्दे पर कर्मचारियों ने बताया कि तहसील स्तर पर वेतन बढ़ाया गया है, लेकिन जिला स्तर के कर्मचारियों का वेतन 2012 से अब तक संशोधित नहीं हुआ है। इसके अलावा, सामान्य प्रशासन और वित्त विभाग द्वारा आकृतिबंध प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बावजूद अंतिम निर्णय लंबित है। 28 अप्रैल 2026 को यह प्रस्ताव प्रधान सचिव को सौंपा गया है और उस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है।


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