– जायकवाड़ी भू-संपादन में बड़ा फर्जीवाड़ा
लातूर :- प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर पहले से ही विवादों में रहे बीड के पूर्व जिलाधिकारी अविनाश पाठक को बीड पुलिस ने गुरुवार को जायकवाड़ी के भूमि घोटाला मामले में लातूर से गिरफ्तार कर लिया. इस कार्रवाई से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है. अविनाश पाठक पर आरोप है कि बीड में उनके जिलाधिकारी रहते हुए भू-अधिग्रहण मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं. इस मामले में बीड के शिवाजीनगर पुलिस थाने में कुल 20 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जिसमें तत्कालीन जिलाधिकारी पाठक का नाम भी शामिल है. जांच के दौरान गठित समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ. रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन जिलाधिकारी के नाम, पदनाम और हस्ताक्षर का दुरुपयोग करते हुए 1 मार्च 2025 से 17 अप्रैल 2025 के बीच 154 मामलों में फर्जी आदेश जारी किए गए. इन आदेशों के आधार पर लगभग 241 करोड़ 62 लाख रुपये का बढ़ा हुआ मुआवजा मंजूर किया गया.
जांच में यह भी सामने आया कि राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 211 (छत्रपति संभाजीनगर क्षेत्र) से लगभग 73 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त कर उसका वितरण किया गया, जिससे प्रारंभिक रूप से 73 करोड़ रुपये के गबन की आशंका जताई गई है. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित आदेशों के लिए कोई रजिस्टर या रिकॉर्ड विधिवत रूप से संधारित नहीं किया गया था. कई आदेश एक ही दिन यानी 17 अप्रैल 2025 को पारित किए गए, जिनमें किसी भी पक्षकार की उपस्थिति या हस्ताक्षर दर्ज नहीं पाए गए, जो गंभीर संदेह उत्पन्न करता है.
राज्य सरकार ने किया था निलंबित
बीड से स्थानांतरण के बाद अविनाश पाठक को मुंबई में मत्स्य आयुक्त के पद पर नियुक्त किया गया था, लेकिन आरोपों के चलते राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था. इससे पहले वे लातूर में निवासी उपजिलाधिकारी और अतिरिक्त जिलाधिकारी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं. गुरुवार सुबह बीड पुलिस की विशेष टीम लातूर पहुंची और गांधी चौक क्षेत्र स्थित उनके निवास से उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया. इसके बाद विधिवत गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई. पुलिस ने इस मामले में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया. आगे की जांच जारी है.