– बावनकुले ने दिया पात्र महिलाओं को न्याय देने का आश्वासन
नागपुर :- पूरे राज्य में 81 लाख महिलाओं को लाड़ली बहन योजना के लिए अपात्र घोषित कर दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप उनके लाभ निलंबित कर दिए गए हैं. जैसे ही विपक्ष ने इस मुद्दे को महायुति सरकार के खिलाफ आलोचना के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले आगे आए. उन्होंने घोषणा की किएक समिति के माध्यम से फिर से सत्यापन की प्रक्रिया आयोजित की जाएगी और आश्वासन दिया कि सभी पात्र महिलाओं को न्याय मिलेगा.
केवाईसी के तहत अयोग्य मानी गई महिलाओं की संख्या 81 लाख है. इसके चलते विपक्ष ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. एनसीपी (शरदचंद्र पवार) गुट के नेता जयंत पाटिल ने कहा कि 8० लाख महिलाओं को अयोग्य घोषित करना राज्य के गंभीर वित्तीय संकट का एक स्पष्ट संकेत है. विधायक रोहित पवार ने आरोप लगाया कि केवाईसी प्रक्रिया महज एक बहाना है, और सरकार का एक छिपा हुआ एजेंडा है कि लाभार्थी महिलाओं की संख्या को कृत्रिम रूप से कम करके इस योजना को बंद कर दिया जाए.
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार और ठाकरे गुट की नेता सुषमा अंधारे ने सरकार पर लाभार्थियों के प्रति एक संकीर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया—जिसे मराठी मुहावरे ‘गरज सरो आणि वैद्य मरो’ (जरूरत पूरी होने के बाद डॉक्टर को छोड़ देना) जैसा बताया गया. इसके जवाब में, सत्ताधारी महायुति सरकार के मंत्रियों को अब स्पष्टीकरण जारी करने पर मजबूर होना पड़ रहा है. सोमवार को नागपुर में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने घोषणा की कि लाडली बहन योजना के तहत पात्रता का फिर से सत्यापन किया जाएगा. उन्होंने स्वीकार किया कि हालांकि कुछ नाम शुरू में निर्धारित मानदंडों को पूरा न कर पाने के कारण बाहर कर दिए गए थे, लेकिन इन मामलों की जांच एक विशेष समिति द्वारा फिर से की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पात्र महिलाओं को न्याय मिले.








