– सुधीर मुनगंटीवार का चुनावी व्यवस्था पर सीधा हमला; “आचार संहिता ने विकास का गला घोंट दिया है”
– “फोकट की राजनीति बंद करो, विकास को खुली राह दो!”
चंद्रपुर :- महाराष्ट्र की राजनीति में अक्सर बेबाक बयान देने वाले पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने इस बार सीधे चुनावी व्यवस्था और बार-बार लागू होने वाली आचार संहिता को निशाने पर लिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर हर कुछ महीनों में चुनाव होंगे और हर बार आचार संहिता लागू होगी, तो विकास कार्य आखिर कैसे पूरे होंगे?
मुनगंटीवार का यह बयान केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं माना जा रहा, बल्कि उस व्यवस्था पर सीधा प्रहार माना जा रहा है जिसके कारण करोड़ों रुपये के विकास कार्य महीनों तक फाइलों में कैद हो जाते हैं।
“जनता विकास मांगे, व्यवस्था चुनाव थमा दे!”
मुनगंटीवार ने कहा कि आज हालात ऐसे बन गए हैं कि महाराष्ट्र में किसी न किसी चुनाव की घोषणा होती रहती है। चुनाव आते ही आचार संहिता लागू हो जाती है और प्रशासनिक मशीनरी विकास छोड़कर चुनावी ड्यूटी में लग जाती है।
परिणाम यह होता है कि सड़कें अधूरी रह जाती हैं, जल योजनाएं रुक जाती हैं, स्कूलों और अस्पतालों के प्रस्ताव लटक जाते हैं और जनता सिर्फ इंतजार करती रह जाती है।
उनका सवाल सीधा था—
“सरकारें विकास के लिए चुनी जाती हैं या सिर्फ चुनाव करवाने के लिए?”
“आचार संहिता या विकास पर ताला?”
मुनगंटीवार ने तीखे अंदाज में कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आवश्यक हैं, लेकिन यदि चुनाव ही व्यवस्था का केंद्र बन जाएं और विकास पीछे छूट जाए तो यह चिंतन का विषय है।
उन्होंने कहा कि बार-बार लागू होने वाली आचार संहिता अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ज्यादा विकास कार्यों की सबसे बड़ी बाधा बनती जा रही है।
“सालभर चुनाव, सालभर रोक… फिर जनता को मिलेगा क्या?”
जिला परिषद चुनाव नहीं, फिर बाकी चुनावों की जल्दी क्यों?
मुनगंटीवार ने स्थानीय स्वराज संस्थाओं के चुनावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिला परिषद चुनाव अभी तक नहीं हुए हैं, फिर भी अन्य चुनावों को लेकर जल्दबाजी दिखाई जा रही है।
उन्होंने पूछा कि क्या ग्रामीण जनता की समस्याएं चुनावी राजनीति से कम महत्वपूर्ण हैं?
विधान परिषद पर भी उठाए सवाल
मुनगंटीवार ने विधान परिषद की वर्तमान अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि जनता के प्रतिनिधि सीधे जनता के वोटों से चुनकर आने चाहिए। लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता का होना चाहिए, न कि बंद कमरों में तय होने वाली समीकरणों का।
केंद्र को भेजेंगे बदलाव का प्रस्ताव
मुनगंटीवार ने संकेत दिए कि वे चुनावी व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग को लेकर केंद्र सरकार को पत्र लिखेंगे। उनका मानना है कि चुनावी खर्च, प्रशासनिक दबाव, विकास कार्यों पर असर और बार-बार लागू होने वाली आचार संहिता पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।



