– पहले भी उठाई थी डिजाइन की त्रुटि, अब नए प्रस्ताव में भी खामियां; लिबर्टी से एलआईसी चौक तक रामझूला शैली का विकल्प बताया बेहतर
नागपुर :- सदर फ्लाईओवर के लिए प्रस्तावित नए लिंक ब्रिज के डिजाइन पर वरिष्ठ पत्रकार एवं जल अध्ययन विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण डबली ने पुनर्विचार की मांग की है। उनका कहना है कि पूर्व में भी उन्होंने इस फ्लाईओवर की मूल डिजाइन में मौजूद गंभीर त्रुटियों की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था। इसके बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने स्वयं डिजाइन में खामियों को स्वीकार करते हुए नए डिजाइन तैयार करने के निर्देश दिए थे।
डॉ. डबली ने कहा कि पहले जिस परियोजना की लागत लगभग 34 करोड़ रुपये थी, वह नए प्रस्ताव में बढ़कर 82 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसके बावजूद यदि प्रस्तावित डिजाइन का गहराई से अध्ययन किया जाए तो उसमें भी कई महत्वपूर्ण कमियां दिखाई देती हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान डिजाइन में केवल सदर से मॉरिस कॉलेज की ओर जाने वाले यातायात को ध्यान में रखा गया है, जबकि मानकापुर और काटोल रोड की दिशा से आने वाले वाहनों के लिए सेंट्रल एवेन्यू एवं रेलवे स्टेशन की ओर जाने का कोई सीधा मार्ग प्रस्तावित नहीं किया गया है। ऐसे में इन क्षेत्रों से आने वाले वाहन चालकों को या तो फ्लाईओवर से उतरकर नीचे के यातायात जाम का सामना करना पड़ेगा अथवा टेकड़ी रोड का लंबा चक्कर लगाकर रेलवे स्टेशन एवं सेंट्रल एवेन्यू की ओर जाना होगा।
डॉ. डबली का कहना है कि यदि इस पहलू पर अभी विचार नहीं किया गया तो भविष्य में यह परियोजना यातायात की समस्या का समाधान करने के बजाय उसे और अधिक जटिल बना सकती है। उन्होंने मांग की है कि प्रस्तावित लिंक ब्रिज से रेलवे स्टेशन एवं सेंट्रल एवेन्यू की दिशा में भी एक अतिरिक्त रैंप बनाया जाए, जिससे मानकापुर और काटोल रोड से आने वाले वाहन सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।
उन्होंने एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार प्रस्तावित परियोजना के लिए कस्तूरचंद पार्क की भूमि का उपयोग किया जाना है, जबकि यह क्षेत्र विरासत (हेरिटेज) महत्व का है। ऐसी स्थिति में आवश्यक अनुमति प्राप्त करना आसान नहीं होगा। यदि अनुमति मिल भी जाती है तो समय के साथ मैदान का स्वरूप और खुला क्षेत्र प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी।
डॉ. डबली ने सुझाव दिया कि इन सभी समस्याओं का अधिक व्यावहारिक समाधान यह होगा कि नए फ्लाईओवर को लिबर्टी चौक से रामझूला की तर्ज पर मोड़ते हुए सीधे एलआईसी चौक तक उतारा जाए। उनका मानना है कि इससे कस्तूरचंद पार्क की भूमि सुरक्षित रहेगी, यातायात का बेहतर वितरण होगा तथा भविष्य की ट्रैफिक आवश्यकताओं को भी प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा।
डॉ. प्रवीण डबली ने प्रशासन एवं संबंधित विभागों से आग्रह किया है कि अंतिम स्वीकृति से पहले प्रस्तावित डिजाइन का पुनः तकनीकी परीक्षण कराया जाए तथा शहर के दीर्घकालीन यातायात हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक संशोधन किए जाएं।
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