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म्यूल अकाउंट्स से साइबर गिरोह बेनकाब

– नागपुर ग्रामीण पुलिस कर रही संदिग्ध बैंक खातों की जांच, 31 केस दर्ज

नागपुर :- नागपुर ग्रामीण पुलिस ने साइबर अपराधों और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हर्ष ए. पोद्दार तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल म्हस्के के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों की जांच कर अब तक 31 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी ऑनलाइन ठगी से प्राप्त रकम को छिपाने और एक खाते से दूसरे खाते में स्थानांतरित करने के लिए अन्य लोगों के नाम पर खोले गए या कमीशन के लालच में उपलब्ध कराए गए बैंक खातों का उपयोग करते हैं। इन्हें म्यूल अकाउंट कहा जाता है। ऐसे खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम का लेन-देन और ट्रांसफर किया जाता है।महाराष्ट्र साइबर से संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी प्राप्त होने के बाद नागपुर ग्रामीण पुलिस ने इन खातों का विस्तृत विश्लेषण और सत्यापन किया। जांच के दौरान खातों में हुए वित्तीय लेन-देन, संदिग्ध राशि के ट्रांसफर और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े संबंधों की गहन पड़ताल की गई। इस जांच के आधार पर नागपुर ग्रामीण जिले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2), 318(4), 3(5) तथा 112(2) (संगठित अपराध) के तहत कुल 31 मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस आरोपियों की तलाश कर उन्हें गिरफ्तार करने की कार्रवाई कर रही है।

म्यूल अकाउंट्स पर सबसे अधिक मामले

पुलिस के अनुसार, महाराष्ट्र में म्यूल अकाउंट्स से जुड़े सबसे अधिक मामले नागपुर ग्रामीण जिले में दर्ज किए गए हैं। इसलिए इन खातों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि साइबर अपराधियों की वित्तीय गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। नागपुर ग्रामीण पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे कमीशन या आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें। ऐसा करना उन्हें अनजाने में साइबर अपराध का हिस्सा बना सकता है।

पुलिस ने कहा कि संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की समय रहते पहचान कर साइबर ठगी की पूरी श्रृंखला को तोड़ना ही इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य है।

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