– २८ जुलाई तक पदोन्नति पर निर्णय लेने के आदेश
सचिन चौरसिया, रामटेक :- आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत माध्यमिक प्रधानाचार्यों की पदोन्नति याचिका पर २८ जुलाई, २०२६ तक फैसला सुनाया जाए। अन्यथा, आदिवासी विकास विभागों के सचिवों को स्वयं स्पष्टीकरण देना होगा, मुंबई उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एम. एस. कर्णिक और एस. एम. मोडक की पीठ ने चेतावनी दी है। न्यायालय ने महाराष्ट्र राज्य के प्रधानाचार्य द्वारा दर्ज की अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। शिक्षकों, प्राथमिक प्रधानाचार्यों और आदिवासी विकास विभाग के अन्य कर्मचारियों के लिए पदोन्नति के अवसर उपलब्ध हैं, जबकि माध्यमिक प्रधानाचार्यों को इन अवसरों से वंचित रखा गया है। महाराष्ट्र राज्य प्रधानाचार्य संघ ने इस अनुचित नीति के विरुद्ध ३ जनवरी, २०२४ को सचिव को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा था। इसमें मांग की गई थी कि माध्यमिक प्रधानाचार्यों को समकक्ष श्रेणी-बी पदों, विशेष रूप से सहायक परियोजना अधिकारी के पद पर प्रतिनियुक्त या पदोन्नत किया जाए। इस अवमानना याचिका पर ६ जुलाई, २०२६ को सुनवाई हुई। सरकार के अनुरोध पर न्यायालय ने अगली सुनवाई २८ जुलाई को निर्धारित की है और तब तक आदेश का पालन करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इस मामले में न्यायालय में कानूनी लड़ाई जारी है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष वामन रिंगने, सचिव अनिल कांबळे, कार्यकारी अध्यक्ष गणेश गावंडे और समिति के पदाधिकारी इस कानूनी लड़ाई पर लगातार नजर रख रहे हैं। अदालत के इस रुख के कारण हजारों प्रधानाचार्यों की पदोन्नति का मुद्दा अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।








