– 2012 से लागू है प्रतिबंध, फिर भी बाजार में खुले तेल की बिक्री जारी
नागपुर :-खाद्य तेल जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तु की बिक्री को लेकर नियम भले ही वर्षों से लागू हों, लेकिन बाजार में उनकी अनदेखी का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। खुले खाद्य तेल की बिक्री पर वर्ष 2012 से प्रतिबंध होने के बावजूद कई स्थानों पर आज भी खुले में तेल बेचने की शिकायतें सामने आती रही हैं। अब एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने इन नियमों को फिर सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। नए निर्देशों के तहत खुले अथवा बिना पैक किए खाद्य तेल की बिक्री अवैध होगी और तेल केवल निर्धारित पैकिंग में ही बेचा जा सकेगा। पैकेट पर तेल के स्रोत, एक्सपायरी डेट समेत आवश्यक जानकारी दर्ज करना भी अनिवार्य होगा। हालांकि, असली सवाल यही है कि इस बार आदेश बाजार में कितनी मजबूती से लागू होता है।
खुले खाद्य तेल की बिक्री पर प्रतिबंध कोई नया फैसला नहीं है। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत लंबे समय से इसके लिए स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं। इसके बावजूद यदि बाजार में खुले तेल की बिक्री होती रही है तो यह निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। नियमित निरीक्षण और प्रभावी कार्रवाई के अभाव में कारोबारी नियमों को नजरअंदाज करने के आदी होते जाते हैं। ऐसे में नए निर्देशों के बाद केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि बाजार में उनकी लगातार निगरानी भी जरूरी होगी।
एक ही टिन का बार-बार इस्तेमाल:
खाद्य तेल की बिक्री में इस्तेमाल होने वाले टिन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। एक बार इस्तेमाल किए गए टिन का दोबारा और कई बार उपयोग किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। खाद्य तेल के भंडारण और बिक्री में पुराने टिन के लगातार इस्तेमाल से स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती है। नियमों के बावजूद यदि यह चलन जारी है तो इसकी जांच और प्रभावी रोकथाम की जरूरत है। कार्रवाई नहीं होने पर कारोबारी इस व्यवस्था को जारी रखते हैं, जिसका सीधा संबंध उपभोक्ताओं की सुरक्षा से है।
निगरानी तंत्र पर उठ रहे सवाल:
जब खुले तेल की बिक्री और पैकिंग को लेकर नियम पहले से मौजूद हैं, तो उनके उल्लंघन पर अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह अहम सवाल है। क्या बाजारों में नियमित निरीक्षण नहीं हो रहा है या जांच के बाद कार्रवाई का असर दिखाई नहीं देता? प्रशासन को अब इन सवालों का जवाब कार्रवाई के जरिए देना होगा। यदि नियम तोड़ने वालों पर लगातार और समान रूप से कार्रवाई नहीं हुई तो नए निर्देश भी महज कागजी आदेश बनकर रह जाएंगे।
उपभोक्ताओं की सेहत से जुड़ा मामला:
खाद्य तेल हर घर में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक खाद्य सामग्री है। ऐसे में उसकी गुणवत्ता, पैकिंग, स्रोत और भंडारण से जुड़े नियमों का पालन सीधे उपभोक्ताओं की सुरक्षा से जुड़ा है। अब निगाहें अन्न एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि खुले तेल की बिक्री रोकने, नियमों के अनुरूप पैकिंग सुनिश्चित करने और पुराने टिन के पुन: उपयोग पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन कितनी गंभीरता से कदम उठाता है।





