– तोतलाडोह में 65 फीसदी पानी, पेंच नहर से करीब एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में होती है सिंचाई
साचिन चौरसिया, रामटेक :- इस वर्ष कम बारिश के चलते रामटेक तहसील के धान किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। 1 जून से 14 अगस्त के बीच तहसील में केवल 469 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 620 मिमी बारिश हुई थी। कम बारिश के कारण प्रमुख जलाशयों में अपेक्षित जलसंचय नहीं हो पाया है। वर्तमान में तोतलाडोह जलाशय में करीब 65 प्रतिशत (661 दलघमी), पेंच खैरी में 52.33 प्रतिशत (74 दलघमी) और खिंडसी में 63.34 प्रतिशत (65 दलघमी) जलसंचय है। तीनों जलाशयों में कुल करीब 800 दलघमी पानी उपलब्ध है।
रामटेक, पारशिवनी, मौदा, कांद्री (जाम) और भंडारा क्षेत्र में पेंच नहर के माध्यम से करीब एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की सिंचाई होती है। धान की फसल के लिए अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में कम से कम तीन सिंचाई चक्र की जरूरत पड़ सकती है। एक 20 दिवसीय सिंचाई चक्र के लिए करीब 200 दलघमी पानी की आवश्यकता होती है। इस हिसाब से तीन चक्रों के लिए करीब 600 दलघमी पानी की जरूरत होगी। इसके अलावा नागपुर शहर और कोराडी के लिए भी जलापूर्ति बनाए रखना जरूरी है। ऐसे में उपलब्ध पानी का संतुलित उपयोग किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
चौराही बांध से मिल सकती है राहत
तोतलाडोह के ऊपरी हिस्से में स्थित चौराही बांध में फिलहाल करीब 46.25 प्रतिशत जलसंचय है। यदि बांध पूरी तरह भर जाता है तो तोतलाडोह जलाशय के लिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध होने की संभावना है। कम बारिश और जलसंकट की ऐसी स्थिति वर्ष 2017 में भी बनी थी। उस समय पानी की कमी के कारण कई किसान धान की बुआई तक नहीं कर पाए थे और पानी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। पेंच जलाशय से वैकल्पिक जल उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी सामने आया था, लेकिन अब तक इस पर अमल नहीं हो सका है।
किसानों को दो बार मिलेगा नहर का पानी
पेंच सिंचाई प्रबंधन की कार्यकारी अभियंता अनीता पराते ने बताया कि किसानों को पेंच नहर से दो बार पानी दिया जाएगा। खरीफ धान की फसल को बचाने के लिए पानी की योजना तैयार की गई है। उन्होंने किसानों से पानी का संयमित उपयोग करने और सिंचाई के दौरान अन्य किसानों की जरूरतों का भी ध्यान रखने की अपील की। उन्होंने बताया कि 1 अगस्त से पेंच नहर में पानी छोड़े जाने के बाद धान की बुआई में तेजी आई है और अब तक करीब 80 प्रतिशत बुआई पूरी हो चुकी है।





