– मुख्यमंत्री फडणवीस का आश्वासन, महावितरण के 10% शेयर बाजार में सूचीबद्ध होंगे
मुंबई/नागपुर :- महाराष्ट्र की सरकारी बिजली कंपनियों के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों में चल रही आशंकाओं के बीच मुख्यमंत्री तथा ऊर्जामंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि राज्य की बिजली निर्मिती, पारेषण और वितरण कंपनियों का किसी भी तरीके से निजीकरण नहीं किया जाएगा। साथ ही महावितरण के केवल 10 प्रतिशत शेयर बाजार में सूचीबद्ध कर पूंजी जुटाने की जानकारी दी गई है।
महाराष्ट्र राज्य विद्युत कर्मचारी, अभियंता, अधिकारी कृति समिति के अनुसार, 18 लंबित मांगों को लेकर मुंबई के सह्याद्री अतिथिगृह में मुख्यमंत्री फडणवीस की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में ऊर्जा राज्यमंत्री मेघना बोर्डीकर, ऊर्जा विभाग की अपर मुख्य सचिव आभा शुक्ला, महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्र सहित तीनों बिजली कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी और 18 कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।
80 हजार करोड़ का कर्ज सरकार संभालेगी:
बैठक में बताया गया कि महावितरण के 10 प्रतिशत शेयर सूचीबद्ध कर जुटाई जाने वाली राशि का उपयोग बुनियादी ढांचे के विकास और कंपनी को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए किया जाएगा। महावितरण पर करीब 80 हजार करोड़ रुपये के कर्ज की जिम्मेदारी सरकार चरणबद्ध तरीके से स्वीकार करेगी।
कृषि कंपनी से सेवाशर्तों पर असर नहीं:
स्वतंत्र कृषि कंपनी गठित होने के बाद भी कर्मचारियों की सेवाशर्तों में बदलाव नहीं किया जाएगा। इस संबंध में कर्मचारी संगठनों के साथ लिखित समझौता करने की बात कही गई। वहीं, महावितरण के कार्यक्षेत्र में निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण का लाइसेंस देने का सरकार ने विरोध किया है।
बोनस और कार्रवाई वापस लेने के निर्देश:
कर्मचारी संगठनों के अनुसार, पिछले दीपावली पर रोका गया बोनस तत्काल देने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए। एक दिन की हड़ताल को लेकर दर्ज न्यायालयीन प्रकरण, परिपत्रक क्रमांक 5555 और वेतन कटौती की कार्रवाई वापस लेने तथा दो दिन का वेतन अवकाश में समायोजित करने के निर्देश भी दिये गये।
ठेका कर्मचारियों के स्थायीकरण का प्रस्ताव
ठेका कर्मचारियों को स्थायी रोजगार देने के लिए हरियाणा की व्यवस्था का एक महीने में अध्ययन कर प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गये। मृत कर्मचारियों के वारिसों को सहायक पद पर नियुक्त करने के बजाय सीधी भर्ती के माध्यम से स्थायी पदों पर समायोजित करने की बात भी बैठक में कही गई। इसमें आरक्षण व्यवस्था प्रभावित नहीं होने का आश्वासन दिया गया।
कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों मोहन शर्मा और कृष्णा भोयर ने बताया कि काम के बढ़ते दबाव, दंडात्मक कार्रवाई, आठ घंटे के कार्यदिवस और चतुर्थ श्रेणी के तकनीकी कर्मचारियों को तृतीय श्रेणी में शामिल करने जैसे मुद्दों पर भी जल्द बैठक होगी।





