– 8 साल में 7 धांधलियों पर फूटा गुस्सा, संविधान चौक पर हजारों युवाओं का प्रदर्शन
नागपुर :- अपने अधिकार, भविष्य और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर बुधवार को पूरे विदर्भ के प्रतियोगी छात्र सड़कों पर उतर आए। नागपुर के ऐतिहासिक संविधान चौक पर विदर्भ के हजारों युवाओं ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) और राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। ‘विदर्भ स्पर्धा परीक्षा समन्वय समिति’ के बैनर तले आयोजित आंदोलन में नागपुर, अमरावती, चंद्रपुर, गड़चिरोली, यवतमाल, वर्धा और भंडारा समेत विदर्भ के विभिन्न जिलों से छात्र पहुंचे।
वर्षों की मेहनत, आर्थिक कठिनाइयों और परिवार से दूर रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर भारी नाराजगी है। इसी आक्रोश के चलते बड़ी संख्या में अभ्यर्थी संविधान चौक पर एकत्र हुए। सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक चले प्रदर्शन में छात्रों ने एमपीएससी की कार्यप्रणाली और परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।
‘सिर्फ एक विभाग नहीं, पूरी व्यवस्था विफल’
हाल ही में औषधि निरीक्षक पद की परीक्षा के पेपर लीक मामले में एमपीएससी के अवर सचिव और सहायक कक्ष अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया है। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि पिछले आठ वर्षों में सात प्रमुख परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इससे आयोग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रों ने मांग की कि एमपीएससी में सक्षम और पारदर्शी अधिकारियों की नियुक्ति की जाए। साथ ही वर्तमान अध्यक्ष और सचिव समेत पेपर लीक मामलों में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
60 से अधिक कोचिंग संस्थानों का समर्थन
आंदोलन को नागपुर के प्रतियोगी परीक्षा क्षेत्र से भी व्यापक समर्थन मिला। शहर के 60 से 70 प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग संस्थानों ने अपने संस्थान बंद रखकर आंदोलन का समर्थन किया। कोचिंग संचालक, शिक्षक और मार्गदर्शक भी छात्रों के साथ संविधान चौक पर मौजूद रहे।
….जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
आंदोलन के समापन पर समन्वय समिति के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद से मुलाकात कर मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में अतुल खोब्रागडे, अभिलाष वराडे, संजय रणदिवे, शैलेश तुमडे, खेमराज चमोशिंकर, संघपाल निकोसे, प्रणय सातकर और अनिकेत माते शामिल थे।
छात्रों ने चेतावनी दी कि परीक्षा व्यवस्था में तत्काल सुधार और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो विदर्भ से शुरू हुआ आंदोलन पूरे महाराष्ट्र में व्यापक रूप ले सकता है।





