– रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर एक्शन का अधिकार मिला
नई दिल्ली :- रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की दिशा में अमेरिका ने एक और कदम बढ़ाया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को ऐसे देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी। बिल के पक्ष में 262 और विरोध में 159 वोट पड़े। अब इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पास भेजा जाएगा। उनके हस्ताक्षर के बाद ही यह कानून का रूप लेगा।
विधेयक का आधिकारिक नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है। अमेरिकी सीनेट इसे अगस्त में 86-11 के मत से पारित कर चुकी है। प्रतिनिधि सभा ने मंगलवार को 214-211 के मत से इसे अंतिम मतदान के लिए आगे बढ़ाया था। विधेयक के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को हर 180 दिन में इस सूची की समीक्षा करने का अधिकार होगा। यानी भविष्य में देशों की स्थिति के आधार पर सूची में बदलाव संभव है। हालांकि, भारत पर 100% टैरिफ तुरंत लागू नहीं होगा। इसके लिए पहले विधेयक का कानून बनना और उसके बाद संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई किया जाना जरूरी होगा।
भारत पर क्या हो सकता है असर?
यदि भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है और उस पर अमेरिकी अतिरिक्त टैरिफ लागू किया जाता है, तो इसका असर भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ सकता है। भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते हैं और कुछ क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर, समुद्री उत्पाद और केमिकल्स जैसे निर्यात क्षेत्रों पर असर की आशंका जताई जा रही है।
दूसरी ओर, यदि अमेरिकी दबाव के कारण भारत रूस से तेल की खरीद कम करता है और वैकल्पिक स्रोतों से अधिक तेल खरीदता है, तो आयात लागत बढ़ सकती है। इसका असर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों और भारत के आयात बिल पर पड़ने की संभावना होगी। हालांकि, वास्तविक प्रभाव अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, भारत की खरीद व्यवस्था और सरकार के फैसलों समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।
रूसी तेल और रक्षा क्षेत्र पर भी कड़े प्रावधान:
विधेयक में रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों से जुड़े कारोबार पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा प्रतिबंधों से बचकर रूसी तेल को दूसरे देशों तक पहुंचाने वाले टैंकरों और उनके नेटवर्क पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे नेटवर्क को आम तौर पर रूस का ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है।
विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से अमेरिका आने वाले कुछ सामान पर 500% तक टैरिफ लगाने का अधिकार भी देने का प्रस्ताव करता है। यह अधिकार पांच साल तक लागू रहने की बात कही गई है।
कानून बनने के बाद तस्वीर होगी साफ
फिलहाल विधेयक अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से पारित हो चुका है, लेकिन राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही यह कानून बनेगा। इसके बाद ही टैरिफ और प्रतिबंधों के वास्तविक दायरे, संबंधित देशों पर लागू होने वाली प्रक्रिया और संभावित छूट की स्थिति स्पष्ट होगी। इसलिए भारत पर इसके अंतिम प्रभाव का आकलन कानून के लागू होने और उसके बाद अमेरिकी प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों के आधार पर ही किया जा सकेगा।





