– 6 नवंबर से आंदोलन की चेतावनी, वेतन-बोनस पर कर्मचारी सख्त
नागपुर :- दिवाली की छुट्टियों में अपने गांव जाने की तैयारी कर रहे यात्रियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन महामंडल (एसटी) के कर्मचारियों के एक संगठन ने 6 नवंबर 2026 से राज्यव्यापी हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर और सदाभाऊ खोत से जुड़े सेवा शक्ति संघर्ष एसटी कर्मचारी संघ ने वेतन, महंगाई भत्ता, सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन समझौते और दिवाली बोनस सहित विभिन्न मांगों को लेकर यह रुख अपनाया है। हालांकि, हड़ताल अभी शुरू नहीं हुई है। दिवाली से पहले सरकार और एसटी महामंडल की ओर से मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर कर्मचारियों और यात्रियों की नजरें टिकी हैं।
संगठन ने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक और एसटी महामंडल प्रबंधन को हड़ताल का नोटिस दिया है। संगठन के महासचिव सतीश मेटकरी ने बताया कि दिवाली से पहले मांगें पूरी नहीं होने पर 6 नवंबर से राज्यव्यापी हड़ताल की जा सकती है। ऐसे में सरकार के सामने कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा कर संभावित हड़ताल टालने की चुनौती है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में वेतन का समय पर भुगतान, राज्य सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर महंगाई भत्ता और सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन समझौता शामिल है। इसके अलावा सेवानिवृत्त कर्मचारियों की बकाया राशि एकमुश्त देने और दिवाली के लिए 15 हजार रुपये बोनस देने की मांग भी की गई है।
भर्ती और भत्तों में बदलाव की मांग
संगठन ने निजी चालकों की भर्ती से बचने और वर्ष 2019 की पात्रता सूची में शामिल उम्मीदवारों को अवसर देने की मांग की है। साथ ही चालक, वाहक और तकनीकी पदों पर भर्ती करने, प्रशासनिक कर्मचारियों का भत्ता बढ़ाने तथा नक्सल प्रभावित और आदिवासी क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के पूरक भत्तों में सुधार करने की मांग रखी गई है। कर्मचारियों के लिए आवास निर्माण अग्रिम की राशि बढ़ाने की मांग भी शामिल है।
इलेक्ट्रिक बसों के अनुबंध रद्द करने की मांग
एसटी महामंडल द्वारा निजी कंपनियों से ली गई इलेक्ट्रिक बसों के अनुबंध रद्द करने की मांग भी संगठन ने उठाई है। इसके अलावा महिलाओं को राष्ट्रीय कॉमन मोबिलिटी कार्ड के बजाय नकद टिकट का विकल्प देने और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के यात्रा टिकट से होने वाली पांच रुपये की कटौती बंद करने की मांग की गई है। कोरोना काल में प्रत्यक्ष रूप से काम करने वाले कर्मचारियों को प्रतिदिन 300 रुपये भत्ता देने की मांग भी की गई है।
दिवाली के दौरान बड़ी संख्या में लोग एसटी बसों से अपने गांव और रिश्तेदारों के यहां जाते हैं। ऐसे में हड़ताल होने पर यात्रियों को बसों की उपलब्धता और यात्रा को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। संगठन ने कर्मचारियों की कमी, अतिरिक्त कार्यभार और बसों के रखरखाव से जुड़ी समस्याओं पर भी सवाल उठाए हैं। अब देखना होगा कि सरकार और एसटी महामंडल बातचीत के जरिए मांगों का समाधान निकालते हैं या दिवाली के दौरान बस सेवाओं पर हड़ताल का असर पड़ता है।








