– फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश के घटनाक्रम का दिया हवाला
नागपुर :- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने फ्रांस में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और अल्बानिया, नेपाल तथा बांग्लादेश के घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि केवल सत्ता या शासन व्यवस्था बदलने से किसी देश के हालात में स्थायी सुधार नहीं होता। उन्होंने ये बातें मंगलवार को नागपुर में आयोजित आरएसएस के विजयादशमी कार्यक्रम में कहीं।
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि पश्चिम से उठी एक लहर स्थापित व्यवस्थाओं, सामाजिक शिष्टाचार और सांस्कृतिक मूल्यों को चुनौती देते हुए उन्हें खत्म करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, ‘देखिए, फ्रांस में क्या हो रहा है, अल्बानिया में क्या हो रहा है और नेपाल तथा बांग्लादेश में क्या हुआ।’ इन देशों के घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल पर अपनी बात रखी।

भागवत ने इस धारणा पर सवाल उठाया कि सरकार या शासन व्यवस्था बदलने से देश की परिस्थितियां अपने आप बेहतर हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि अतीत में भी सत्ता परिवर्तन से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले और भविष्य में भी केवल इसी तरीके से हालात बदलने की उम्मीद नहीं की जा सकती।उन्होंने कहा, ‘लोग कहते हैं कि सत्ता बदलने से परिस्थितियां बदल जाएंगी। लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं हुआ और अब भी ऐसा नहीं होगा।’ उनके संबोधन में इस बात पर जोर रहा कि राजनीतिक उथल-पुथल के बीच केवल सत्ता में बैठे लोगों को बदल देना किसी देश की बुनियादी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं है। उल्लेखनीय है कि आरएसएस की स्थापना वर्ष 1925 में हुई थी। संगठन इस वर्ष अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शताब्दी वर्ष मना रहा है। संघ का वार्षिक विजयादशमी कार्यक्रम उसके प्रमुख आयोजनों में शामिल है। इस दौरान सरसंघचालक समाज, शासन व्यवस्था और राष्ट्रीय जीवन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपना दृष्टिकोण रखते हैं।
कार्यक्रम में इजराइल के काउंसल जनरल भी पहुंचे
कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, इजराइल के काउंसल जनरल यानिव रेवाच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद रहे।








