– हाईकोर्ट के निर्देश की अनेदेखी, जलसंकट सिर पर मनपा बेखबर!
नागपुर :- शहर में आगामी गर्मी के दौरान संभावित जलसंकट की चिंता बढ़ रही है। ऐसे में पेयजल के वैकल्पिक स्रोत माने जाने वाले गोरवाड़ा तालाब में अब भी गंदा पानी बहकर पहुंच रहा है। इसके बावजूद नागपुर महानगरपालिका की ओर से इस समस्या को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट के नागपुर खंडपीठ के निर्देश के बावजूद समस्या का बने रहना चिंता का विषय है।
रविवार को किए गए मौके के निरीक्षण में तालाब में गंदा पानी प्रवेश करता दिखाई दिया। इससे जलसंकट की आशंका के बीच शहर के जलस्रोतों की सुरक्षा को लेकर मनपा की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं। जल संसाधन विभाग के अनुसार, तोतलाडोह, कामठी-खैरी, खिंडसी, नांद और वडगांव इन पांच प्रमुख जलाशयों में कुल जीवित जलसंग्रह 699.42 मिलियन घनमीटर (एमसीएम) दर्ज किया गया। वहीं, शहर के प्रमुख पेयजल स्रोत तोतलाडोह में 18 अक्टूबर को केवल 433.11 एमसीएम पानी शेष था। इसकी कुल निर्धारित क्षमता 1,016.93 एमसीएम है। इस तरह जलाशय में क्षमता का महज 42.59 प्रतिशत पानी बचा है, जबकि पिछले साल इसी तारीख को जलसंग्रह 98.76 प्रतिशत था।

आज भी दूषित पानी पीने को मजबूर
नागपुर संभाग के सभी छह जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बाद उपलब्ध जलस्रोतों का संरक्षण और भी महत्वपूर्ण हो गया है। गर्मी 2027 में पानी की मांग बढ़ने की आशंका के बीच गोरवाड़ा तालाब जैसे वैकल्पिक स्रोतों को प्रदूषण से बचाना जरूरी है। निरीक्षण के दौरान कांग्रेस के नगरसेवक शैलेश पांडे भी मौजूद थे। उन्होंने तालाब में लगातार गंदा पानी छोड़े जाने पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि मनपा को काफी पहले ही इस प्रवाह को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए थे। लेकिन, मनपा की लापरवाही के कारण शहर की जनता आज भी दूषित पानी पीने को मजबूर है।उन्होंने गोरवाड़ा तालाब को गर्मी 2027 में नागपुरवासियों के लिए जीवनरेखा साबित होने वाला संभावित जलस्रोत बताया।








