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23.19 करोड़ के गोल्ड लोन घोटाले में एक और गिरफ्तार

– ICICI बैंक में नकली सोना गिरवी रखकर लिया गया था करोड़ों का गोल्ड लोन

नागपुर :- आईसीआईसीआई बैंक में नकली सोने के आभूषणों को असली बताकर गोल्ड लोन मंजूर कराने और बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने के मामले में नागपुर की आर्थिक अपराध शाखा ने एक और वांछित आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान तेलंगखेड़ी, रामनगर, नागपुर निवासी प्रफुल्ल अशोक चौधरी (39) के रूप में हुई है। इस मामले में अब तक कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में धंतोली पुलिस थाने में 30 मार्च 2026 को मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आईसीआईसीआई बैंक को 23 करोड़ 19 लाख 41 हजार 751 रुपये का आर्थिक नुकसान होने का उल्लेख है। जांच में सामने आया कि वर्ष 2018 से 2019 के दौरान मुख्य आरोपी सचिन राऊत ने पहले अपने नाम पर गोल्ड लोन लेकर बैंक में अपनी साख बढ़ाई। इसके बाद बैंक के गोल्ड लोन लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपने परिचितों और मजदूरों के नाम पर फर्जी गोल्ड लोन मंजूर कराए गए।

पुलिस के मुताबिक, इस पूरे मामले में बैंक के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि बैंक के विभिन्न शाखाओं के अधिकारियों ने गोल्ड लोन मंजूर कराने में मदद की, जबकि सोने की शुद्धता और वजन का गलत मूल्यांकन किया गया।

155 नकली आभूषणों का मूल्यांकन करने का आरोप

जांच के अनुसार, गोल्ड अप्रेजर नंदू खरवड़े ने कथित तौर पर 155 नकली सोने के आभूषणों का मूल्यांकन किया। आरोप है कि प्रत्येक रिपोर्ट के बदले उसे 5,000 रुपये दिए जाते थे। उसने अपने परिचितों, मित्रों और रिश्तेदारों के नाम पर 38 फर्जी गोल्ड लोन ग्राहकों की व्यवस्था भी की थी।

इसके अलावा, ऑडिट के दौरान नकली सोने को असली बताने वाली रिपोर्ट दिलाने के लिए ऑडिटरों को पैसे दिए जाने का भी आरोप है। पुलिस का कहना है कि फर्जी ग्राहकों, बैंक अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की मिलीभगत से कथित आपराधिक साजिश को अंजाम दिया गया।

30 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत

आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले में पहले 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अब प्रफुल्ल अशोक चौधरी की गिरफ्तारी के बाद गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या 10 हो गई है। आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 30 अक्टूबर 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

मामले की आगे की जांच पुलिस उपायुक्त (अपराध शाखा) दीपक अग्रवाल के मार्गदर्शन में आर्थिक अपराध शाखा द्वारा की जा रही है। पुलिस इस घोटाले में अन्य लोगों की भूमिका और आर्थिक लेन-देन की जांच कर रही है।

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