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प्यारे खान की याचिका पर 5 प्रतिवादियों को नोटिस

<p><strong>&&num;8211&semi; आरोप लगाने वालों से मांगा 250 करोड़ हर्जाना<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p><strong>नागपुर &colon;- <&sol;strong>राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे जिया खान ने मानहानिकारक आरोप लगाने के मामले में विश्व हिंदू परिषद &lpar;विहिप&rpar; और बजरंग दल के पांच पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के खिलाफ 250 करोड़ रुपये का मानहानि दावा दायर किया है। उन्होंने प्रत्येक प्रतिवादी से 50 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है। वरिष्ठ दीवानी न्यायाधीश ए&period; डी&period; कराडभाजने ने मामले की सुनवाई करते हुए पांचों प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं।<&sol;p>&NewLine;<p>मानहानि दावे के अनुसार&comma; 28 सितंबर 2024 को महल के बडकस चौक में विहिप और बजरंग दल ने प्यारे खान को अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने की मांग को लेकर आंदोलन किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने कुख्यात गैंगस्टर अबू सलेम से संदिग्ध मुलाकात की और देशविरोधी गतिविधियों का समर्थन किया। खान ने अदालत में इन आरोपों को झूठा&comma; निराधार और उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से लगाया गया बताया है।<&sol;p>&NewLine;<p>इस मामले में अमोल ठाकरे&comma; विलास पाटिल&comma; शुभम आर्खेल&comma; गजेंद्र उर्फ टीकू विज और लखन कुरिल को प्रतिवादी बनाया गया है। खान ने प्रत्येक से 50 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग के अलावा मानहानिकारक सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगाने&comma; सोशल मीडिया से संबंधित रील्स&comma; वीडियो और पोस्ट हटाने तथा सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का आदेश देने की मांग भी की है। उनकी ओर से एड&period; आनंद देशपांडे&comma; एड&period; गौरांग भाके और एड&period; चेतन डोंगरे ने पैरवी की।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>अबू सलेम से मुलाकात बनी विवाद की वजह<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>विवाद 8 सितंबर को नाशिक रोड मध्यवर्ती कारागार के निरीक्षण के दौरान प्यारे खान और अबू सलेम की मुलाकात को लेकर शुरू हुआ था। वर्ष 1993 के मुंबई बम विस्फोट मामले में दोषी अबू सलेम ने अपनी सजा के 25 वर्ष पूरे होने का हवाला देते हुए रिहाई की मांग की थी। इस मुलाकात पर विहिप ने आपत्ति जताते हुए खान के इस्तीफे की मांग की थी। हालांकि&comma; खान ने स्पष्ट किया था कि यह मुलाकात अल्पसंख्यक आयोग के आधिकारिक निरीक्षण का हिस्सा थी।<&sol;p>&NewLine;