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हिमाचल में सुबह-सुबह लगे भूकंप के झटके

<p><strong>&&num;8211&semi; चंबा और कांगड़ा में कांपी धरती&comma; घरों से बाहर निकले लोग<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p><strong> à¤¬à¥ˆà¤œà¤¨à¤¾à¤¥ &lpar;हिमाचल&rpar; &colon;- <&sol;strong> à¤¹à¤¿à¤®à¤¾à¤šà¤² प्रदेश के कांगड़ा और चंबा जिले में शुक्रवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह की शुरुआत के साथ धरती में हुई इस हलचल ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता की ओर ध्यान खींचा है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी &lpar;एनसीएस&rpar; के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3&period;2 मापी गई।<&sol;p>&NewLine;<p>भूकंप सुबह 6 बजकर 59 मिनट पर आया। इसका केंद्र जमीन के भीतर करीब 15 किलोमीटर की गहराई में दर्ज किया गया। कांगड़ा और चंबा क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियों के मद्देनजर यह घटना एक बार फिर लोगों को सतर्क रहने का संदेश दे रही है। उल्लेखनीय है कि कांगड़ा और चंबा में पिछले कुछ सालों से लगातार भूकंप के छोटे झटके दर्ज किए जा रहे हैं।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>1905 का वो भयावह दिन&comma; जब मलबे में तब्दील हो गया था कांगड़ा<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>कांगड़ा की धरती पर भूकंप का इतिहास बेहद भयावह रहा है। 4 अप्रैल 1905 को सुबह करीब 6 बजकर 20 मिनट पर आए विनाशकारी भूकंप ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया था। इस भूकंप की तीव्रता लगभग 7&period;8 से 8&period;0 के बीच आंकी गई थी।<&sol;p>&NewLine;<p>इस प्राकृतिक आपदा में हजारों मकान जमींदोज हो गए थे और 18&comma;000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। कुछ ऐतिहासिक और सरकारी अभिलेखों में मृतकों की संख्या 20 हजार से अधिक बताई गई है।धर्मशाला&comma; कांगड़ा और आसपास के क्षेत्रों में भारी तबाही हुई थी। कांगड़ा शहर में अधिकांश इमारतें ढह गई थीं। धर्मशाला में भी बड़े पैमाने पर भवनों को नुकसान पहुंचा था। यह भूकंप भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में गिना जाता है।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है कांगड़ा-चंबा क्षेत्र<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>हिमाचल प्रदेश का अधिकांश पर्वतीय क्षेत्र भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार कांगड़ा और चंबा सहित कई जिले उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्र में आते हैं। हिमालय की भूगर्भीय संरचना और सक्रिय टेक्टोनिक प्रक्रियाओं के कारण इस क्षेत्र में समय-समय पर छोटे-बड़े भूकंप आते रहते हैं।<&sol;p>&NewLine;<p>केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में संसद में दी गई जानकारी में भी कांगड़ा-चंबा-धर्मशाला क्षेत्र को भूकंपीय जोन-V में शामिल बताया था। यह देश का सबसे अधिक भूकंपीय जोखिम वाला जोन है।<&sol;p>&NewLine;