– अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, परिजनों में रोष
नागपुर :- कांद्री नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 4 में रहने वाले 19 वर्षीय युवक शशांक सचिन वानखेड़े की डेंगू के इलाज के दौरान शुक्रवार,19 सितंबर को मौत हो गई। शशांक नागपुर के एनआयटी कॉलेज में बी.टेक. तृतीय वर्ष का छात्र था। उसकी अचानक हुई मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर उमड़ पड़ी.
जानकारी के अनुसार शशांक को बुखार आने पर परिजनों ने गुरुवार 17 सितंबर को कांद्री स्थित ‘अरुणा हॉस्पिटल’ में ओपीडी उपचार लिया। शुक्रवार 18 सितंबर को ज्यादा तबीयत बिगड़ने पर अरुणा हॉस्पिटल में उसे भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, वहां के डॉक्टरों ने ब्लड रिपोर्ट नॉर्मल बताई। हालांकि, तबीयत में कोई सुधार न होने पर डॉक्टरों की सलाह पर उसे कुछ ही घंटों में कामठी स्थित ‘लाइफ लाइन हॉस्पिटल’ में रेफर किया गया। वहां जांच के दौरान शशांक डेंगू पॉजिटिव पाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से स्थानीय अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्लेटलेट्स घटकर रह गए थे 10,000:
लाइफ लाइन हॉस्पिटल के असिस्टेंट डॉ. विश्वजीत राजपूत ने बताया, ‘रक्त जांच में मरीज डेंगू पॉजिटिव पाया गया था और उसके प्लेटलेट्स घटकर महज 10,000 तक आ गए थे, जबकि सामान्यतः यह 3.5 लाख तक होने चाहिए. हमने उसे बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। यदि समय पर सही डायग्नोसिस (जांच) होती, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।‘
परिजनों में रोष, अस्पताल में हंगामा
शशांक अपने पीछे माता-पिता और एक छोटी बहन को छोड़ गया है। इस दुखद घटना के बाद स्थानीय कांद्री नगर पंचायत के स्वच्छता प्रबंधन और स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति लापरवाही को लेकर भी नागरिकों में आक्रोश है। बेटे की मौत से परिजनों में भारी रोष था, उन्होंने अस्पताल की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए अस्पताल में हंगामा किया। परिजनों ने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। ऐसे में अब पुलिस और चिकित्सा विभाग की विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही मामले की पूरी सच्चाई सामने आएगी।





