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मंदिर तोड़कर बनाई मस्जिद

– भोजशाला केस में खोली जन्मकुंडली

धार :- मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को लेकर चल रहे विवाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट ने नई बहस छेड़ दी है. इंदौर हाईकोर्ट की बेंच के सामने एएसआई ने साफ शब्दों में कहा है कि वर्तमान ढांचा परमार काल के हिंदू मंदिरों के अवशेषों, खंभों और मूर्तियों के टुकड़ों से बनाया गया है.

एएसआई की टीम ने खुदाई और सर्वे के दौरान पाया कि यह जगह तीन अलग-अलग दौर से गुजरी है. सबसे पुराना हिस्सा 10वीं-11वीं शताब्दी का है, जहां मिट्टी पर ईंटों का ढांचा खड़ा किया गया था. दूसरे दौर में विशाल पत्थरों का इस्तेमाल कर इसे भव्य रूप दिया गया और यहां ‘शारदा सदन’ जैसे महान ग्रंथों के शिलालेख लगाए गए.

सर्वे में यह बात सामने आई है कि मौजूदा ढांचा बहुत जल्दबाजी में बनाया गया है. इसमें डिजाइन का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया. रिपोर्ट कहती है कि वहां मौजूद 106 खंभे और 82 दीवार-खंभे असल में पुराने मंदिरों का हिस्सा थे. गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह और भैरव जैसे देवताओं की मूर्तियों को बेरहमी से काटकर या घिसकर निर्माण में इस्तेमाल किया गया. खिलजी राजा महमूद शाह के दौर का एक शिलालेख मिला है, जो साफ कहता है कि उसने मूर्तियों को नष्ट किया और इस मंदिर को हिंसा के साथ मस्जिद में तब्दील कर दिया.

मिटा दी गई राजा भोज की निशानी

जांच में पाया गया कि राजा भोज और अन्य परमार शासकों से जुड़े शिलालेखों को छैनी से घिस दिया गया था ताकि उनकी पहचान छिपाई जा सके. पश्चिम की दीवार में बनी मेहराब भी बाद का निर्माण है, जो पुराने बेसल्ट प्लेटफॉर्म पर जबरन टिकाई गई है. एएसआई ने साफ किया कि यहां संस्कृत लिखने वाले लोग अरबी और फारसी लिखने वालों से बहुत पहले से रह रहे थे.

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