नागपुर २ : नागपुर के कोराडी पावर प्लांट के ऐश हैंडलिंग प्लांट (AHP-ESP) के वार्षिक रखरखाव (मेंटेनेंस) कार्यों में भारी अनियमितता और करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यूनियन लीडर भीमराव बाजनघाटे ने एक प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया है कि इन अनियमितताओं के कारण सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
बाजनघाटे के अनुसार, कोराडी के 660×3 मेगावाट वाले ऐश हैंडलिंग प्लांट के AHP और ESP संयंत्रों का रखरखाव और सफाई तीन पालियों में ठेका कर्मियों द्वारा की जानी चाहिए। लेकिन, यह काम सिर्फ एक पाली में 8 घंटे के लिए श्रमिकों से कराया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप, ऐश हैंडलिंग प्लांट में हजारों टन राख जमा हो रही है, जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है। इस प्रदूषण के कारण वहां काम करने वाले ठेका श्रमिकों और सरकारी कर्मचारियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, श्रमिकों को पाली भत्ता भी नहीं दिया जा रहा है, जबकि सरकार प्रदूषण नियंत्रण पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है।
रखरखाव में लापरवाही और आर्थिक नुकसान
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है कि बिजली उत्पादन के दौरान कोयले से निकलने वाली राख को श्रमिकों द्वारा फावड़े से इकट्ठा करके वैकपैक मशीन के जरिए ट्रैक्टर या ट्रक में लोड करके ऐश बांध में डाला जाना चाहिए। लेकिन, इस प्रक्रिया का पालन करने के बजाय, राख को सीधे फायर फाइटिंग पाइप के जरिए पानी के प्रेशर से एक टैंक में धकेला जा रहा है। इसका नतीजा यह है कि जमीन के कंकड़-पत्थर राख के साथ गुडवेल पंप के अंदर फंस रहे हैं, जिससे पंप के पुर्जे खराब हो रहे हैं। इसकी मरम्मत में महानिर्मिति को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और लाखों रुपये का कीमती पानी भी बर्बाद हो रहा है, जिसे नागपुर महानगर पालिका और सिंचाई विभाग से महंगा खरीदना पड़ता है।
बाजनघाटे ने आरोप लगाया है कि पावर प्लांट के सेक्शन प्रभारियों के मनमाने रवैये के कारण पाइपलाइन और बॉटम टी भी खराब हो रहे हैं, जिससे करोड़ों का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस गंभीर समस्या को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन सौंपा गया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने महानिर्मिति के डायरेक्टर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद, कोराडी पावर प्लांट के प्रमुख अधिकारियों की लालफीताशाही के चलते राख धूल की समस्या अभी भी बनी हुई है।
बिजली उत्पादन पर असर और जनता पर बोझ
यूनियन लीडर ने आगे कहा कि महानिर्मिति पावर प्लांट के वरिष्ठ अधिकारियों और इंजीनियरों के मनमाने रवैये के कारण सरकार का दिवाला निकल रहा है और इसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ रहा है। परिणामस्वरूप, बिजली की ऊंची दरों का बोझ जनता पर पड़ रहा है। यह सब 2018 से ही चल रहा है। बाजनघाटे ने महानिर्मिति प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया है कि इस घोर अनियमितता और भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई भी लोकप्रतिनिधि या नेता कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।




