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सरकारी कार्यालयों पर भी बकाया

– आर्थिक संकट को लेकर स्थिति गंभीर

 भंडारा :- शहर में जल आपूर्ति व्यवस्था और उससे जुड़े आर्थिक संकट को लेकर स्थिति गंभीर होती जा रही है। पानी का टैक्स करीब 1.5 करोड़ रुपए नागरिकों और खासकर जिला अस्पताल एवं जिलधिकारी कार्यालय जैसे सरकारी कार्यालयों पर भी बकाया है। कई बार नोटिस देने के बावजूद वसूली में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने से अब प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। किंतु पानी के टैक्स की वसूली करना अब नगर परिषद के सामने चुनौती बनती जा रही है। शहर में वर्तमान में लगभग 11 हजार पुराने नल कनेक्शन हैं। जबकि तेजी से हो रहे शहरीकरण के चलते यह संख्या बढ़कर 14 हजार तक पहुंचने की संभावना है। नए कनेक्शनों की डेटा एंट्री प्रक्रिया जारी है, जिससे जल आपूर्ति पर दबाव और बढ़ रहा है। नगर परिषद के अनुसार, मार्च तक विशेष अभियान चलाकर कुछ बकाया राशि वसूल की गई थी, लेकिन अब भी बड़ी रकम बाकी है।

खास बात यह है कि, जिला सामान्य अस्पताल, पोस्ट ऑफिस और जिलाधिकारी कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों पर भी पानी का टैक्स बाकी है। बढ़ती आबादी और धीमी गति से चल रही योजना के कारण शहर में जल संकट गहरा गया है।

नियमित आपूर्ति नहीं होने से नागरिकों का भरोसा भी कमजोर हुआ है। लोग अब पीने के लिए आरओ पानी पर निर्भर हो रहे हैं, जिससे उनका खर्च बढ़ गया है। दूसरी ओर दूषित पानी मिलने और अनियमित जलापूर्ति से नाराजगी बढ़ रही है। इसके साथ ही बकाया वसूली के लिए सख्त कार्रवाई की चेतावनी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। योजना अधूरी, संकट गहराया शहर के लिए प्रस्तावित 57 करोड़ रुपए की विस्तारित जल आपूर्ति योजना पिछले 8 वर्षों से अधूरी पड़ी है। करीब 90 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा किया जा रहा है। ‘तकनीकी समस्याओं के कारण कुछ क्षेत्रों में जलापूर्ति बाधित हो रही है। बकाया वसूली के लिए आगे भी सख्त अभियान चलाया जाएगा और सरकारी विभागों से वसूली के लिए उच्च स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

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