– भाजपा ने विवादास्पद चेहरा को सत्तपाक्ष बनाकर शायद बड़ी भूल की !
नागपुर :- बाल्या बोरकर यूँ तो प्रवीण दटके और संदीप जोशी के बराबरी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के टीम में काम कर चुके है। इसी वरिष्ठता और पहुंच के आधार पर उन्हें सम्पूर्ण मनपा प्रशासन संभालने का मौका दिया गया लेकिन अपनी आदत से मजबूर बाल्या आ जा के रोजी रोटी की मासिक जुगाड़ में मनपा परिवहन विभाग में ‘चवन्नी – अठन्नी ‘ ढूंढने के क्रम में विभाग के सम्बन्धितों के कपड़े फाड़ने हेतु आगामी आमसभा में सवाल उठाने वाले है। बाल्या बोरकर इसके पूर्व 2 दफ़े परिवहन समिति के सभापति रह चुके है, इसके अलावा एक दफ़े स्थाई समिति सभापति भी थे। इनका कार्यकाल अत्यंत विवादों में रहा,मनमानी गैरकानूनी हरकतों के कारण स्वतः नितिन गडकरी भी खफा रहे और पदमुक्त किये गए।

अब जबकि मनपा चुनाव बाद अधिकांश दिग्गजों की मनपा से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष दूरी हो गई और वरिष्ठता सह मुख्यमंत्री गुट के करीबी होने के कारण मनपा में महिलाराज के बाद एकमात्र दिग्गज पदाधिकारी अर्थात सत्तपाक्ष नेता पद की दर्जेदार जिम्मेदारी दी गई। इस पद पर आसिन पदाधिकारी अपने पक्ष,पक्ष के नगरसेवक,पदाधिकारी सह मनपा प्रशासन के मध्य समन्वय बनाकर अपने कार्यकाल को ‘चार चांद ‘ लगा सकता है। लेकिन बाल्या मासिक आमदनी की जुगाड़ में सिर्फ परिवहन विभाग पर हमला बोल रहे है,क्यूंकि इन्हें इसी विभाग के अलावा अन्य किसी विभाग की बारीकी मालूम नहीं और जब तक समझ आएगी,समय बीत चुका होगा। इसलिए ‘बाल्या ‘ ने अपने पुराने विभाग अर्थात पुराना जुगाड़ पर पुनः ध्यान केन्द्रित करते हुए परिवहन विभाग को घेरना शरू कर दिये। उल्लेखनीय यह है कि विभाग सकते में है कि महत्व किसको दे !

सत्तपाक्ष नेता को या वर्त्तमान परिवहन सभापति मंगला खेकरे को या फिर विधायक प्रवीण दटके समर्थक यूनियन नेता नागेश सहारे को। मामला ‘मासिक देन’ का ही है,इस चक्कर में ‘ बाल्या ‘ गर्म चल रहा,नतीजा विभाग में तैनात दटके समर्थक अधिकारी सकते में है,करे तो क्या करे या जाए तो जाए कहाँ …..ज्यादा विरोध करेंगे तो तीसरे का फायदा हो जाएगा ।
– राजीव रंजन कुशवाहा




