spot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_img

अंतरराष्ट्रीय किडनी तस्करी नया खुलासा

– नोटरी के बयान से खुली पोल

चंद्रपुर :- महाराष्ट्र में चर्चित रोशन कुळे किडनी बिक्री प्रकरण में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल दिल्ली निवासी डॉ. रविंद्रपाल सिंह पर मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ को गुमराह करने का प्रयास करने का आरोप सिद्ध होने के बाद अदालत ने उनकी याचिका खारिज करते हुए 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। ब्रह्मपुरी निवासी किसान रोशन कुळे द्वारा कर्ज के दबाव में अपनी किडनी बेचने के आरोपों से शुरू हुआ यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है।

इस रैकेट के मुख्य संदिग्ध डॉ. रविंद्रपाल सिंह ने 24 जून 2026 को ब्रह्मपुरी न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद अदालत ने उन्हें 10 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया था। पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए डॉ. सिंह ने मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में रिट याचिका दायर की थी। इस याचिका के साथ उन्होंने 22 जून 2026 का एक शपथपत्र (एफिडेविट) भी प्रस्तुत किया था। सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने इस शपथपत्र में गंभीर अनियमितताओं और कथित फर्जीवाड़े की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया।

जांच के दौरान जिस नोटरी अधिवक्ता एडवोकेट पूनम मून के समक्ष शपथपत्र पर हस्ताक्षर किए जाने का दावा किया गया था, उनका आधिकारिक बयान और नोटरी रजिस्टर की जांच की गई। जांच में सामने आया कि डॉ. रविंद्रपाल सिंह कभी भी नोटरी के समक्ष हस्ताक्षर करने पहुंचे ही नहीं थे। इतना ही नहीं, रजिस्टर में दर्ज हस्ताक्षर और शपथपत्र पर मौजूद हस्ताक्षरों में भी स्पष्ट अंतर पाया गया। इससे अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता ने न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि, “न्यायालय सत्य और न्याय का पवित्र स्थान है। यहां झूठ बोलकर या तथ्य छिपाकर लाभ लेने वालों को कोई संरक्षण नहीं दिया जा सकता। याचिकाकर्ता कोई अशिक्षित व्यक्ति नहीं, बल्कि पेशे से डॉक्टर है। ऐसे शिक्षित व्यक्ति से अपेक्षा थी कि वह स्वच्छ हाथों से अदालत में आए, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।”

इस बीच मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए चंद्रपुर स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) की टीम गुरुवार को डॉ. रविंद्रपाल सिंह को साथ लेकर तिरुचिरापल्ली (त्रिची) रवाना हुई। पुलिस वहां किडनी तस्करी से जुड़ी घटनाओं का सीन रीकंस्ट्रक्शन करेगी और मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने का प्रयास करेगी। हाईकोर्ट में कथित फर्जी शपथपत्र पेश करने के मामले के सामने आने के बाद डॉ. रविंद्रपाल सिंह की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। वहीं पुलिस अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले इस किडनी तस्करी नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हुई है।

दो सप्ताह में जुर्माना भरने का आदेश

हाईकोर्ट ने न्यायालय को गुमराह करने के गंभीर आरोपों को देखते हुए याचिका तत्काल खारिज कर दी और डॉ. रविंद्रपाल सिंह पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने आदेश दिया कि यह राशि दो सप्ताह के भीतर ‘पब्लिक वेलफेयर अकाउंट’ में जमा कराई जाए। निर्धारित समय में राशि जमा नहीं करने पर आगे की कार्रवाई किए जाने की भी चेतावनी दी गई है।


Click above on our news logo to access the Daily E_Newspaper.
For articles or advertisements, contact us at: dineshdamahe86@gmail.com.

Copyright Disclaimer: If Any Image, video or article belongs to its respective owner/creator. Full credit goes to the original creator. No copyright infringement intended.