मुंबई :- बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया है कि प्राथमिक शिक्षा विद्यार्थियों का संवैधानिक अधिकार है। प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य नहीं किया जा सकता है। अदालत की इस टिप्पणी की शिक्षक संगठनों ने स्वागत किया है और सरकार से मांग की है कि वह तकनीकी वजहों से हो रही परेशानी का संज्ञान लेते हुए बच्चों को राहत देने का कोई रास्ता निकाले। शिक्षक भारती के कार्याध्यक्ष सुभाष मोरे ने कहा कि हम इस आदेश का स्वागत करते हैं आज भी महाराष्ट्र में करीब 4 लाख बच्चे ऐसे हैं, जो आधार पंजीकरण में आ रही परेशानी के चलते स्कूल से बाहर दिख रहे हैं। हास्यास्पद बात यह है कि बच्चे स्कूल में हैं। वे रोजाना पढ़ाई करने आ रहे हैं, लेकिन आधार मान्य न होने पर उस बच्चे के लिए शिक्षक की मान्यता नहीं मिलती।








