चंडीगढ़ :- हरियाणा के चर्चित आई.डी.एफ.सी. और ए.यू. स्मॉल फाइनैंस बैंक से जुड़े करीब 590 करोड़ रुपए के घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सी.बी.आई.) ने चंडीगढ़ और पंचकूला में 7 स्थानों पर छापेमारी की। सी.बी.आई. ने जिन 7 स्थानों पर तलाशी ली उनमें आरोपियों के आवास, ज्वैलर्स के शोरूम, सरकारी धन के कथित लाभार्थियों के परिसर और जांच से जुड़े अन्य निजी संस्थान शामिल हैं। सी.बी.आई. ने यह कार्रवाई 14 मई की शाम को की जिसकी जानकारी एजेंसी ने खुद आधिकारिक रूप से जारी की है।
तलाशी दौरान एजेंसी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। बता दें कि यह घोटाला हरियाणा के कई सरकारी विभागों से जुड़ा बताया जा रहा है जिनमें पंचायत विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बिजली विभाग और पंचकूला नगर निगम शामिल हैं। इस मामले में अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। साथ ही इस मामले में सी.बी.आई. ने हरियाणा के 5 वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 17-ए के तहत जांच की अनुमति मांगी थी जिसे सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। सी.बी.आई. ने कहा कि जल्द आई.ए.एस. अफसरों से भी पूछताछ की जाएगी।
इस घोटाले में मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सख्त रुख अख्तियार किया है। सी. एम. के आदेशों पर ही पहले ए सी बी और बाद में सी बी आई जांच शुरूकरवाई गई। अब 17-ए की मंजूरी देकर सरकार ने संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी रतर पर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी। 5 वरिष्ठ आई ए. एस अधिकारियों के खिलाफ पूछताछ की अनुमति मिलजे के बाद हरियाणा की नौकरशाही में हलचल तेज हो गई है। सी.बी आई संबंधित अधिकारियों से पूछताछ कर कई नए खुलासे कर सकती है। बताया गया कि जांच एजेंसियों को गिरफ्तार आरोपियों के बयानों, दस्तावेजों, फाइल मूवमेंट और कथित ऑडियो/डिजिटल रिकॉर्डिंग में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम मिलजे का दावा किया जा रहा है। सूत्रों अनुसार, रिकॉर्डिंग में फंड ट्रांसफर, बैंक खातों का संचालन और कार्रवाई से बचने के तरीके जैसे विषयों पर बातचीत के संकेत मिले हैं। सी बी आई इन रिकॉर्डिंग को फॉरेंसिक जांच करवा रही है।
घोटाले के मुख्य किरदारों में आई.डी.एफ.सी. फर्स्ट बैंक की सैक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा का पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि है। बाद में इसने ए.यू. स्मॉल फाइनेंस बैंक ज्वाइन कर लिया था। इसे इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। इसने फर्जी कम्पनियों के नाम पर खाते खुलवाकर सरकारी धन को वहां डायवर्ट करने की साजिश रची। दूसरे नंबर पर अभय है जो बैंक में पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर था। इसने अगस्त 2025 में इस्तीफा दे दिया था। जांच अनुसार, अभय और रिभव ने मिलकर फर्जी चैक और भुगतान निर्देशों के जरिए करोड़ों रुपए की हेराफेरी की। वहीं जांच में निजी कम्पनियों के संचालक (पैसा प्राप्त करने वाले) के तौर पर स्वाति सिंगला का नाम आया। यह आरोपी अभय की पत्नी है।