नई दिल्ली :- देश की ‘जीवन रेखा’ कहलाने वाली भारतीय रेलों में चोरी, हत्या तथा बलात्कार जैसी घटनाएं जारी रहने के कारण इनमें आम आदमी के लिए यात्रा करना कठिन होता जा रहा है जिनकी इसी वर्ष की चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं.
11 जनवरी को मुंबई की एक लोकल ट्रेन में एक यात्री ने हिंदी में बात कर रहे सह-यात्रियों को जबरन मराठी बोलने के लिए मजबूर किया और मना करने पर उनके साथ बुरी तरह मारपीट की तथा अपशब्द कहे।
24 जनवरी को ‘ठाणे-डोंबीवली लोकल ट्रेन’ में भीड़ के कारण सीट न मिलने के चलते हुए विवाद में 2 महिला यात्रियों ने एक-दूसरी के बाल खींचे तथा आपस में जम कर लात-घूंसे बरसाए।
8 फरवरी को मुंबई के घाटकोपर स्टेशन पर एक लोकल ट्रेन के लेडीज कोच में एक पुरुष बुर्का पहन कर घुस गया और महिला यात्रियों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की।
11 फरवरी को ‘भोपाल’ (मध्य प्रदेश) में जी.टी. एक्सप्रैस में ‘बीना’ तथा ‘विदिशा’ स्टेशनों के बीच 2-3 वेेटरों द्वारा एक यात्री को बेरहमी से पीटते हुए घसीट कर पैंट्री कार में ले जाने का वीडियो वायरल हुआ।
15 फरवरी को अहमदाबाद-गोरखपुर एक्सप्रैस में यात्रा कर रही एक एन.सी.सी. कैडेट युवती स्टेशन पर भीड़ के कारण टिकट नहीं ले पाई और ए.सी. कोच में चढ़ गई। उसे सीट दिलाने का झांसा देकर एक टी.टी. ने कैबिन में ले जाकर उससे बलात्कार कर डाला और ‘देवरिया’ मेंं ट्रेन से उतर कर फरार हो गया।
6 मार्च को होली के त्यौहार के दौरान हुड़दंगियों ने बिहार में धीमी गति से चल रही एक पैसेंजर ट्रेन पर कीचड़, रंग और गोबर फैंका जिससे खिड़की के पास बैठे यात्रियों में दहशत फैल गई।
13 मार्च को पटना जा रही बिहार रूट की एक ट्रेन के जनरल कोच में सीट को लेकर एक महिला और युवक के बीच हिंसक झड़प हुई। महिला ने युवक को चप्पल दिखाकर गालियां निकालीं जिसके बाद युवक ने महिला को चलती ट्रेन में कई थप्पड़ जड़ दिए।
19 मार्च को ‘आला हजरत एक्सप्रैस ट्रेन’ में गलती से स्लीपर कोच में सफर कर रही एक महिला यात्री के साथ टी.टी.ई. ‘द्वारका शर्मा’ द्वारा बदसलूकी तथा उस पर हमला करने का मामला सामने आया।