– नागपुर आरटीओ में रिश्वतखोरी का भंडाफोड़, एसीबी ने अधिकारी और लिपिक को रंगे हाथ पकड़ा
नागपुर :- भ्रष्टाचार प्रतिबंधक दल (एसीबी) ने उपप्रादेशिक परिवहन कार्यालय, नागपुर ग्रामीण के सहायक परिवहन अधिकारी और लिपिक सहित दो आरोपियों को 4 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई शुक्रवार की दोपहर को हुई. आरोपियों में सहायक परिवहन अधिकारी अनूप सानप और लिपिक मोहन दिवटे का समावेश है. आरटीओ की टीम ने शिकायतकर्ता के ट्रक को ओवरलोड गिट्टी भरने पर 50 हजार 750 रुपए की चालान कार्रवाई की थी.
उपरोक्त चालान रकम सहित शिकायतकर्ता ट्रक छुड़ाने के लिए ग्रामीण आरटीओ कार्यालय पहुंचा था. लेकिन टुक को क्रॉसिंग नहीं करके छोड़ने के लिए लिपिक दिवटे ने 5 हजार रुपए की रिश्वत आरटीओ कार्यालय के अधिकारी व कर्मचारियों पर अक्सर घूसखोरी के आरोप लगते है. अनेक बार रिश्वत लेते कर्मचारियों को गिरफ्तार भी किया गया है. इसके बाद भी दिवटे जैसे कर्मचारी सबक नहीं ले रहे हैं.
इसके लिए सहायक परिवहन अधिकारी सानप की भी सहमति थी. लेकिन फरियादी के 5 हजार रुपए देने में असमर्थता जताने पर दिवटे ने 4 हजार रुपए में ट्रक छोड़ने का सौदा तय किया. परंतु रिश्वत देने की इच्छा नहीं होने से फरियादी ने एसीबी कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई. जिसके बाद एसीबी टीम ने योजना बनाकर शिकायतकर्ता ग्रामीण आरटीओ कार्यालय भेजा. वहां आरोपियों के रिश्वत लेते लेते ही ही एसीबी एसीबी द दल ने दोनों को रिश्वत की रकम सहित गिरफ्तार को कर लिया. आरोपियों के खिलाफ कपिलनगर पुलिस स्टेशन में भ्रष्टाचार प्रतिबंध अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के तहत मामला दर्ज किया गया है. यह कार्रवाई एसीबी के पुलिस अधीक्षक डॉ. दिगंबर प्रधान, अपर पुलिस अधीक्षक माधुरी बावीस्कर, विजय माहुलकर के मार्गदर्शन में पुलिस निरीक्षक राजकिरण येवले, जितेंद्र वैरागड़े, हवलदार भरत ठाकुर, हेमराज गांजरे, दीपाली भगत, होमेश्वर होमेश्वर वाईलकर, राजेंद्र जांभुलकर आदि ने की.
एसीबी की सटीक कार्रवाई : टीम ने ट्रैप ऑपरेशन में दिखाया दम
यह पूरी कार्रवाई एसीबी के पुलिस अधीक्षक डॉ. दिगंबर प्रधान, अपर पुलिस अधीक्षक माधुरी बावीस्कर और विजय माहुलकर के मार्गदर्शन में की गई। ऑपरेशन में पुलिस निरीक्षक राजकिरण येवले, जितेंद्र वैरागड़े, भरत ठाकुर, हेमराज गांजरे, दीपाली भगत, होमेश्वर वाईलकर और राजेंद्र जांभुलकर शामिल थे। दोनों आरोपियों पर भ्रष्टाचार प्रतिबंध अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के तहत मामला दर्ज किया गया है।




