– हैदराबाद राजपत्र लागू, ओबीसी समाज में उबाल – नागपुर में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी
– आरक्षण से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं, ओबीसी समाज का सरकार को दो टूक संदेश
चंद्रपुर / नागपुर :- महाराष्ट्र सरकार द्वारा हाल ही में अध्यादेश के माध्यम से लागू किए गए ‘हैदराबाद राजपत्र’ ने राज्य की राजनीति और सामाजिक संतुलन को झकझोर कर रख दिया है। इस फैसले को ओबीसी समाज के आरक्षण और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा प्रहार मानते हुए अब राज्य भर से विरोध की आवाजें तेज हो गई हैं। महाराष्ट्र सरकार द्वारा अध्यादेश के माध्यम से लागू किए गए हैदराबाद राजपत्र का कड़ा विरोध करने के लिए 10 अक्टूबर को नागपुर शहर में सम्पूर्ण ओबीसी समाज द्वारा एक विशाल मार्च निकाला जाएगा। इस मार्च में ओबीसी वर्ग की 374 जातियाँ भाग लेंगी। विधायक सुधाकर अड़बाले ने सभी ओबीसी समाज के लोगों से एकजुट होकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने की अपील की है।
सम्पूर्ण ओबीसी समाज राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए हैदराबाद राजपत्र को तत्काल निरस्त करने की पुरज़ोर माँग कर रहा है। अड़बाले ने यह भी विश्वास व्यक्त किया है कि इस मार्च के माध्यम से सरकार इस राजपत्र को वापस लेने के लिए मजबूर हो जाएगी। इस कड़ी में, 10 अक्टूबर 2025 को नागपुर में संपूर्ण ओबीसी समाज द्वारा एक विशाल मोर्चा निकाला जाएगा। यह आंदोलन न केवल विरोध का स्वर होगा, बल्कि सरकार को चेतावनी भी कि यदि ओबीसी आरक्षण से छेड़छाड़ हुई, तो संघर्ष और तेज होगा।
हैदराबाद राजपत्र’ दरअसल एक पुराना दस्तावेज है, जिसे अब वर्तमान आरक्षण नीति के संदर्भ में नवीन जाति गणना और सामाजिक पिछड़ेपन के निर्धारण के आधार के रूप में उपयोग किया जा रहा है। ओबीसी समाज का आरोप है कि यह राजपत्र उनकी कई जातियों को पिछड़ा वर्ग की सूची से बाहर कर सकता है और आरक्षण खत्म करने की साजिश है।
ओबीसी नेताओं और संगठनों का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से संविधान विरोधी है और इससे समाज में व्यापक असंतोष फैल सकता है। चंद्रपुर, अमरावती, अकोला, बुलढाणा, गोंदिया, गडचिरोली जैसे जिलों से हजारों कार्यकर्ता नागपुर में मोर्चा में शामिल होने आ रहे हैं।
मोर्चा नागपुर के संविधान चौक से शुरू होकर जिलाधिकारी कार्यालय तक जाएगा, जहां मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। आयोजकों का कहना है कि यह मार्च पूर्णतः शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक होगा, लेकिन यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।
हैदराबाद राजपत्र को तात्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। ओबीसी समाज की सभी जातियों को यथावत आरक्षण मिले। अध्यादेश के माध्यम से सामाजिक न्याय के साथ की गई छेड़छाड़ पर मुख्यमंत्री सफाई दें।
हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। कई विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की बात कही है और ओबीसी समाज के साथ खड़े रहने की घोषणा की है। 10 अक्टूबर का नागपुर मोर्चा सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि ओबीसी समाज के हक और अस्तित्व की लड़ाई बनता जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस दबाव का सामना कैसे करती है और क्या फैसला लेती है।




