– ठेकेदारों की लापरवाही से प्यासा इलाका, ओसीडब्ल्यू की पाइपलाइन बार-बार क्षतिग्रस्त
– निर्माण कार्यों की कीमत नागरिक चुका रहे , पानी की पाइपलाइन ‘टारगेट’ पर?
नागपुर :- धरमपेठ जोन में जलापूर्ति पाइपलाइन को ठेकेदारों द्वारा बार-बार नुकसान पहुंचाए जाने के कारण क्षेत्र में जलापूर्ति गंभीर रूप से बाधित हो गई है. पिछले 5 दिनों में ओसीडब्ल्यू की 200 मिमी व्यास वाली जलापूर्ति पाइपलाइन को 4 बार नुकसान पहुंचाया गया है. लगातार हो रहीं इन घटनाओं के कारण रामनगर कमांड एरिया के तहत आने वाले पांढराबोडी, हिल टॉप, जयनगर और सेवानगर के निवासियों को पानी की आपूर्ति नहीं होने की व्यापक शिकायतें ओसीडब्ल्यू कॉल सेंटर में दर्ज करानी पड़ी हैं. इन घटनाओं का सिलसिला 13 दिसंबर को शुरू हुआ जब सीमेंट सड़क के निर्माण के दौरान 200 मिमी व्यास की जलापूर्ति पाइपलाइन खराब हो गई.
एसओपी की मांग : ओसीडब्ल्यू ने हर बार मरम्मत कार्य तुरंत किया और जल्द से जल्द पानी की आपूर्ति बहाल की है लेकिन महत्वपूर्ण जलापूर्ति के मूलभूत ढांचे को होने वाला नुकसान नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी पैदा कर रहा है और पानी वितरण प्रणाली भी संदेह के घेरे में आती है. भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और नागरिकों की आगे की असुविधा टालने के लिए ओसीडब्ल्यू ने प्रस्ताव दिया है कि सभी तीसरी पार्टी की संस्थाओं और ठेकेदारों को कोई भी खुदाई शुरू करने से पहले, विशेष रूप से एचडीडी या यांत्रिक ट्रेचिंग के कार्यों में, ऑपरेटर के साथ समन्वय स्थापित करके भूमिगत उपयोगिताओं और पाइपलाइन की स्थान की पुष्टि अनिवार्य रूप से करनी चाहिए. इसके अतिरिक्त काम शुरू करने से पहले प्री-डिग सत्यापन और अलाइनमेंट क्लीयरेंस के लिए एक औपचारिक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जानी चाहिए और उसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए.
ओसीडब्ल्यू ने एसओपी लागू करने की मांग उठाई
बताया जाता है कि 16 दिसंबर को निर्माण कार्यों के दौरान परिणय फुके के निवास के पास मुख्य पाइपलाइन को फिर से नुकसान पहुंचा. उसी दिन उसी पाइपलाइन को सॉकेट एंड के पास पहली रिसाव वाली जगह से लगभग 3 मीटर की दूरी पर, फिर से क्षति पहुंचाई गई. 17 दिसंबर को उसी 200 मिमी व्यास वाली पाइपलाइन को चौथी बार नुकसान पहुंचाया गया. इन लगातार हो रहे नुकसानों के कारण न केवल नियमित जल आपूर्ति बार-बार बाधित हुई है बल्कि पाइपलाइन का संबंधित खंड कमजोर हो गया है और यह स्थायी रूप से रिसाव का एक स्रोत बन गया है.




