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सावनेर दुय्यम निबंधन कार्यालय में ‘जुगाड़’ की चर्चा,

– विधायक आशिष देशमुख के नाम के दुरुपयोग की आशंका

सावनेर :- दुय्यम निबंधन कार्यालय सावनेर इन दिनों चर्चाओं में बना हुआ है। हाल ही में सावनेर क्षेत्र के NA-48 अंतर्गत कुछ रजिस्ट्रियां टीपी (टाउन प्लानिंग) स्वीकृति न होने के कारण रोकी गई थीं। इसके बाद लगभग 102 से अधिक रजिस्ट्रियां हिंगना में कराए जाने की जानकारी सामने आ रही है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बताया जा रहा है कि रजिस्ट्रियां रोके जाने से उत्पन्न परिस्थितियों के बीच कुछ छुटभैये नेता सावनेर कार्यालय में “जुगाड़” लगाने में सक्रिय हो गए। चर्चा है कि कुछ लोगों ने प्रभाव दिखाने के लिए विधायक आशिष देशमुख तथा भाजपा नेता एवं सावनेर नगर अध्यक्ष के पति मंदर मंगले के नाम का उपयोग किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार न तो विधायक आशिष देशमुख और न ही मंदर मंगले को इन गतिविधियों की कोई आधिकारिक जानकारी है।

इसके बावजूद यह चर्चा है कि कुछ लोगों ने कार्यालय में अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में रजिस्ट्रियां कराई जा रही हैं, जिनमें से कुछ को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मोटी कमीशनखोरी की भी चर्चाएं हैं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

स्थानीय स्तर पर यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि कुछ तत्व जनप्रतिनिधियों की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। आम जनता का मानना है कि संबंधित जनप्रतिनिधियों का इन गतिविधियों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कोई संबंध नहीं है, फिर भी उनके नाम का उपयोग कर निजी लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।

कुछ महीने पहले राजस्व मंत्री द्वारा आकस्मिक निरीक्षण (रेड) किया गया था, जिसमें कार्यालय में विभिन्न अनियमितताओं की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई करते हुए चौकशी और तबादला किया गया था। वर्तमान में कार्यरत दुय्यम निबंधक के कार्यकाल को लेकर भी स्थानीय नागरिकों के बीच असंतोष की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि लंबित रजिस्ट्रियों को कथित रूप से आर्थिक लेन-देन के आधार पर प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि:

• पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

• NA-48 से संबंधित तथा अन्य सभी संदिग्ध रजिस्ट्रियों की समीक्षा की जाए।

• अपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर की जा रही किसी भी रजिस्ट्री पर तत्काल रोक लगाई जाए।

• यदि किसी जनप्रतिनिधि के नाम का दुरुपयोग हो रहा है तो संबंधित व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

• कार्यालय की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

जनता का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में स्पष्टता लानी चाहिए, ताकि कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का समाधान हो सके और आम नागरिकों का विश्वास बना रहे। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस प्रकार की सभी विवादित रजिस्ट्रियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की जा रही है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन चर्चाओं पर क्या संज्ञान लेता है और क्या किसी उच्च स्तरीय जांच की घोषणा की जाती है।

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