– सुधीर मुनगंटीवार ने अपनी ही सरकार पर बोला हमला
नागपुर :- भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने सरकारी निधियों के वितरण में असंतुलन को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है और कहा है कि विदर्भ के लोगों के साथ विश्वासघात नहीं होना चाहिए. मुनगंटीवार ने विदर्भ और मराठवाड़ा के नेताओं की बार-बार मांग के बावजूद पिछले पांच वर्षों में वैधानिक विकास निगमों की स्थापना में राज्य सरकार की विफलता पर अपना विरोध जताया. मुनगंटीवार ने विदर्भ के लोगों के लिए न्याय की मांग करते हुए पूछा कि क्या वे विदर्भ में हुरड़ा पार्टी केलिए आये है?.
विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने मंगलवार को एक संगीत कार्यक्रम में ‘एक दिन बिक जाए, माटी के मोल’ गीत गाया था. उन्होंने इसका जिक्र करते हुए कहा कि, अब जब एक दिन बीत ही गया है, तो किसी को चुप क्यों रहना चाहिए?. मुनगंटीवार ने सदन को बताया कि वे विदर्भ के लोगों को न्याय दिलाने के लिए काम करते रहेंगे. वैधानिक विकास बोर्डों का कार्यकाल 3० अप्रैल, 2०2०को समाप्त हो गया था, जिसके बाद उन्होंने स्वयं, अशोक चव्हाण, नितिन राउत, मेघना बोरडीकर और कई अन्य नेताओं ने सरकार को पत्र लिखकर वैधानिक विकास बोर्डों की स्थापना की मांग की थी. लेकिन राज्य सरकार द्वारा वैधानिक विकास बोर्डों की स्थापना के लिए केंद्र सरकार को कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है. जब राज्य सरकार ने बजट पेश किया, तो उसने विदर्भ, मराठवाड़ा और शेष महाराष्ट्र केलिए आवंटित धनराशि के आंकड़े दिए. लेकिन अब 75,०० करोड़ रुपये की पूरक मांगें प्रस्तुत की गई हैं. मुनगंटीवार ने आरोप लगाया कि विदर्भ-मराठवाड़ा के लिए सरकार द्वारा दिखाई गई धनराशि में असंतुलन है और जनता की आंखों में धूल झोंकी गई है. राज्य सरकार द्वारा किए गए समझौते के अनुसार, शीतकालीन सत्र नागपुर में आयोजित किया जाता है, जिसके लिए राज्य सरकार 2०० करोड़ रुपये खर्च करती है. लेकिन वैधानिक विकास बोर्ड और जनसंख्या के लिए धनराशि आवंटित किए बिना सत्र आयोजित करने का क्या लाभ?, ऐसा मुनगंटीवार ने सवाल किया. विदर्भ-मराठवाड़ा के लंबित कार्यों की जांच के लिए दांडेकर समिति और डॉ. विजय केलकर की समितियों का गठन किया गया था, उनकी रिपोर्ट आ चुकी हैं. लेकिन सरकार लंबित कार्यों को समाप्त करने के लिए क्या कर रही है?. मुनगंटीवार ने यह भी आलोचना की कि राज्य सरकार वैधानिक विकास बोर्डों की स्थापना न करके संविधान के अनुच्छेद 371(2) का अपमान कर रही है.




