– खेती ठप, रोजगार बंद हुआ तो मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट
नागपुर :- सूखे की मार झेल रहे किसानों और खेत मजदूरों के सामने अब रोजगार का संकट भी गहराने लगा है। खेतों में फसलें सूखने से किसान पहले ही परेशान हैं, वहीं केंद्र सरकार की ‘बीवी जी राम जी’ योजना के तहत फसल कटाई के दौरान 60 दिनों तक रोजगार के काम बंद रखने के प्रावधान से मजदूरों की चिंता बढ़ गई है। जिस समय खेतों में फसल कटाई के लिए मजदूरों की जरूरत होती है, उस दौरान उन्हें खेती और रोजगार योजना, दोनों जगह काम नहीं मिलने की आशंका है। ऐसे में ग्रामीण परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर सवाल खड़ा हो सकता है।
केंद्र सरकार की ‘बीवी जी राम जी’ योजना के तहत साल में 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। कृषि विभाग के अनुसार, सोयाबीन और कपास जैसी फसलों की कटाई सामान्यतः 15 अक्टूबर के बाद शुरू होती है, जबकि तुअर की कटाई का समय 15 नवंबर के बाद आता है। किसानों को कटाई के दौरान पर्याप्त मजदूर मिल सकें, इसके लिए योजना के तहत 60 दिनों तक रोजगार के काम बंद रखने का प्रावधान किया गया है।
हालांकि, इस साल सूखे के कारण कई क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंचा है। खेतों में उत्पादन ही प्रभावित होने से किसानों के सामने यह सवाल है कि जब फसल होगी ही नहीं, तो कटाई के लिए मजदूरों की जरूरत कैसे पड़ेगी? दूसरी ओर, यदि रोजगार योजना के काम भी बंद रहे, तो खेत मजदूरों के पास कमाई का कोई भरोसेमंद विकल्प नहीं बचेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका है।
सूखे में काम बंद रखने पर पुनर्विचार की मांग
‘बीवी जी राम जी’ योजना की आयुक्त अनिता मेश्राम के अनुसार, किसानों को कटाई के लिए मजदूर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 60 दिनों तक रोजगार के काम बंद रखने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, सूखे जैसी परिस्थितियों में इस व्यवस्था में छूट देने का अधिकार राज्य सरकारों के पास है। उन्होंने बताया कि कटाई के दिनों को लेकर राज्य सरकार की ओर से अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है।
मजदूरी बढ़ाने की जरूरत : सांसद बर्वे
क्षेत्र के कांग्रेस सांसद श्यामकुमार बर्वे ने सूखे की स्थिति को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ खेत मजदूर भी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में रोजगार के काम बंद करने के बजाय मजदूरों को काम उपलब्ध कराने और मजदूरी बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने राज्य सरकार से इस संबंध में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की मांग की।
सूखे के बीच फसल उत्पादन में गिरावट और रोजगार के काम बंद होने की आशंका ने ग्रामीण मजदूरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब निगाहें राज्य सरकार के निर्णय पर टिकी हैं कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में 60 दिनों तक काम बंद रखने के प्रावधान में कोई राहत दी जाएगी या नहीं।








