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215 बेरोजगारों को रोजगार, 112 ने किया रक्तदान

– जाणता राजा प्रतिष्ठान, काटोल का सराहनीय उपक्रम

काटोल :- जरूरतमंदों और बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जाणता राजा प्रतिष्ठान, काटोल की ओर से शुक्रवार को लक्ष्मी कमल भवन, पंचवटी, काटोल में रोजगार सम्मेलन, स्‍वास्‍थय जांच शिविर, रक्तदान शिविर एवं चश्मा वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रतिष्ठान के अध्यक्ष मिलिंद देशमुख के नेतृत्व में किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत छत्रपति शिवाजी महाराज की आरती से हुई। इसके बाद विभिन्न सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी उपक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्घाटन जाणता राजा प्रतिष्ठान के अध्यक्ष मिलिंद देशमुख ने किया, जबकि समारोह की अध्यक्षता जान्हवी देशमुख ने की। इस अवसर पर कारा फाउंडेशन की संचालिका जोया शेख, इमरान शेख, स्वप्निल गुंधालेे, परिवहन महामंडल काटोल कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष इमरान भाई शेख, संदीप माहुलकर, कपिल गायकवाड, पृथ्वीराज देशमुख, प्रणित ढवेले और शैलेश बाविस्कर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

रोजगार सम्मेलन में कुल 215 बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए। चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र मिलिंद देशमुख और जान्हवी देशमुख के हाथों प्रदान किए गए। रोजगार मिलने पर युवाओं ने आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

542 लोगों की स्वास्थ्य जांच

स्‍वास्‍थय जांच शिविर में 542 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। जरूरतमंद मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श के साथ निशुल्क दवाओं का वितरण भी किया गया। वहीं, 224 लोगों को निशुल्क चश्मे वितरित किए गए। कार्यक्रम के दौरान गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे 16 लोगों की सर्जरी नागपुर में निशुल्क कराने की व्यवस्था किए जाने की जानकारी आयोजकों ने दी।

112 लोगों ने किया रक्तदान

रक्तदान शिविर में 112 रक्तदाताओं ने उत्साहपूर्वक रक्तदान किया। आयोजकों ने बताया कि रक्तदान के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर मिलिंद देशमुख ने कहा कि दीन-दलित और जरूरतमंद लोगों की सेवा ही परम धर्म है। पिछले 15 वर्षों से लगातार समाजसेवा के माध्यम से जरूरतमंदों की सहायता करने का प्रयास किया जा रहा है और इसी कार्य से उन्हें आत्मिक आनंद मिलता है। कार्यक्रम को सफल बनाने में पृथ्वीराज देशमुख, शैलेश बाविस्कर, देवांशू पांडे, शंकर भांगे, सार्थक पाचपोहर, उज्वल उमप, शिव भांगे, रुजल सोनकुसेले और कृष्णा माहुलकर ने सहयोग किया।

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