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भारत–म्यानमार सीमा से ज़हर की एंट्री : सड़ी सुपारी की अंतरराष्ट्रीय तस्करी का जाल

– नागपुर बना सुपारी तस्करी का हब: इंडोनेशिया से म्यानमार होकर भारत तक खेल

नागपुर :- भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों, विशेषकर भारत-म्यानमार सीमा पर, इंडोनेशिया की सड़ी सुपारी की तस्करी एक गंभीर चुनौती बन गई है. इंडोनेशिया और अन्य दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों से परिवहन गिरोहों के माध्यम से आने वाली यह सुपारी अवैध मार्गों से भारत में तस्करी की जाती है, जिससे केंद्र सरकार को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है और आम नागरिकों के स्वास्थ्य को भी खतरा होता है. देश में सक्रिय तस्कर गिरोह सीमा पार करके इंडोनेशिया से म्यानमार के रास्ते भारत में सुपारी लाते हैं. सुपारी मलेशिया, फिलीपींस, श्रीलंका, नेपाल आदि देशों से भी भारत पहुंचती है. तस्कर दक्षिण एशियाई मुक्तव्यापार क्षेत्र के तहत आयात शुल्क छूट का लाभ उठाने के लिए जाली सर्टिफिकेट आऊफ आरिजिन प्रमाण पत्र और कम मूल्य के बिलों का इस्तेमाल करते हैं. तस्करी की गई यह सुपारी म्यानमार से असम होते हुए महाराष्ट्र के नागपुर और गोंदिया जैसे शहरों तक पहुंचाई जाती है. नागपुर यह इस तस्करी का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है. यहां से कच्चे सुपारी ट्रकों द्वारा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे अन्य राज्यों में भेजी जाती हैं. कच्चे सुपारी को सख्त और चमकाने के लिए खतरनाक सल्फर डाइऑक्साइड का उपयोग किया जाता है, जिससे कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बना रहता है. दूसरी ओर, मिजोरम, असम और त्रिपुरा के स्थानीय सुपारी उत्पादक म्यानमार से आने वाली सस्ती और अवैध कच्ची सुपारी के कारण भारी आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं. वहीं, एक अनुमान के अनुसार, केंद्र सरकार को सुपारी की तस्करी और आयात शुल्क की चोरी के कारण हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है.

सुपारी तस्करी पर कार्रवाई अधूरी क्यों?

हालांकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) और स्थानीय पुलिस इस गिरोह के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन ये कार्रवाई केवल ट्रकों और सुपारी के माल को जब्त करने तक ही सीमित है. हालांकि, यह एक गंभीर सवाल है कि पुलिस या अन्य संबंधित विभाग इस तस्कर गिरोह के सरगना तक क्यों नहीं पहुंच पा रहे हैं. पहले तस्कर सडक़ों पर सुपारी बेचा करते थे.

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