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स्थानीय स्वराज्य चुनावों को लेकर सरगर्मी तेज। मुद्दे वही पर उम्मीद अब भी कायम।

प्रदेश में जहां स्थानीय स्वराज्य चुनाव जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई है। वहीं इसका असर अब सिरोंचा तहसील में देखने को मिलने लगे है। इन चुनावों को लेकर प्रदेश के दोनों मुख्य गठबंधनों में चुनावी संग्राम की विजुअल बज चुकी है। सिरोंचा तहसील में कुल 04 जिला परिषद और 08 पंचायत समिति सीटों पर चुनाव होने है।

बता दे कि सिरोंचा तहसील में चार जिला परिषद सीटों में से तीन अनुसूचित जाति हेतु आरक्षित है जबकि एक सीट सर्वसामान्य हेतु है। तहसील के इन सभी चारों सीटों पर नजर डाला जाए तो पायेंगे कि सभी सीटों के अधिनस्त क्षेत्रों में मुद्दे आज भी वहीं है जो बीते कहीं दशकों से बने हुए है।जिनमें प्रमुख रूप से शिक्षा, सड़क, पुल पुलिए, स्वास्थ्य, बिजली , रोजगार, पलायन, यातायात , व्यापार है। हालांकि गुजरते समय के साथ इनमें पूर्व की अपेक्षा कुछ हद सुधार या कहे बदलाव हुए है। मगर बावजूद उसके आज भी मुद्दे वही है। विशेषकर सिरोंचा तहसील के झिंगानूर–आसरअल्ली एवं जाफराबाद–विट्ठलरावपेटा (मोयाबीनपेटा ) सीटों के अधिनस्त क्षेत्रों में हालात कुछ हद तक चिंताजनक है। जबकि अरडा –अंकिसा (लक्ष्मीदेवपेटा) एवं जानमपल्ली –नारायणपुर सीटों के अधिनस्त क्षेत्र मुख्यमार्गों से जुड़े हुए होने के चलते हालात कुछ हद तक चिंताजनक नहीं है।

इन क्षेत्रों की राजनैतिक स्थित पर बात की जाए तो महाविकास आघाड़ी के मुकाबले महायुति आघाड़ी कुछ हद तक मजबूत नजर आती है। यह बात बीते स्थानीय स्वराज्य चुनावों के परिणामों के आधार पर कही जा रही है। मगर अब बदले हुए हालात और बदले हुए राजनैतिक घटना क्रमों के मद्देनजर चुनावी परिणामों में उलट फेर होने की गुंजाइश भी बनी हुई है।

राजनैतिक जगत से जुड़े हुए लोग यह भी मान रहे है कि अगर स्थानीय स्वराज्य चुनाव गठबंधन के आधार पर ना लड़ कर स्वतंत्र रूप से लड़ा जाएगा तो महाविकास आघाड़ी के कांग्रेस, राकांपा (शरद पवार गट), पर महायुति आघाड़ी के भाजपा पर उसके ही गठबंधन की राकांपा (अजीत पवार गट) भारी पड़ सकता है। इसका एक वजह मौजूदा स्थानीय विधायक राकांपा (अजीत पवार गट) से होना भी माना जा रहा है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावो में राकांपा के अजीत पवार गुट के धर्मराव बाबा आत्राम को महायुति ने अहेरी विधानसभा में अपनी उम्मीदवार के रूप में उतारा था। जिस पर धर्मराव बाबा ने जीत दर्ज कर महायुति गठबंधन का परचम लहराया था। इस जीत ने राकांपा (अजीत पवार गट) के कार्यकर्ताओं में एक जोश का संचार किया था। हालांकि उससे पूर्व संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में स्थानीय संसदीय सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार रहे नामदेव किरसान ने जीत दर्ज की थी। इस तरह से कहा जा सकता है कि नामदेव किरसान के जीत का प्रभाव कुछ हद तक स्थानीय स्वराज्य के चुनावो में देखा जा सकता है। महाविकास आघाड़ी के कार्यकर्ताओं के लिए नामदेव किरसान एक ऊर्जा का श्रोत साबित हो सकते है।जबकि महाविकास आघाड़ी के पास अजय कंकडालवार के रूप में पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष के रूप में एक अनुभवशाली चेहरा है। जिनका प्रभाव सिरोंचा तहसील के अलावा पूरे विधानसभा पर देखा जा सकता है। हालांकि इनका एक मुख्य साथी बानैया जनगम ने हाल ही में इनका साथ छोड़ कर स्थानीय विधायक धर्मराव बाबा आत्राम का हाथ थाम ली है। बानैया जनगम को जमीनी स्तर के नेता के रूप में सिरोंचा में जाना जाता है। उनके राकांपा (अजीत पवार गुट) में आने से निश्चित तौर पर धर्मराव बाबा आत्राम के जमीनी पकड़ मजबूत हुई है। जनग़म बानैया को सिरोंचा तहसील में अनुसूचित जाति समुदाय के बड़े लीडर के रूप में जाना जाता है। इस तरह से तहसील के तीनों जिला परिषद सीटों जो कि अनुसूचित जाति हेतु आरक्षित है उन पर असर डाल सकता है।

अब अगर स्थानीय मुद्दों की बात की जाए जो प्रमुख रूप से स्थानीय स्वराज्य के चुनावो में असर डाल सकते है वो प्रमुख रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क , पुल पुलिए, रोजगार, पलायन, यातायात, स्थानीय स्वरोजगार, शुद्ध पेय जल, बेहतर संचार व्यवस्था, बिजली व्यवस्था है। इस मामले में जहां स्थानीय विधायक के पास अपने क्षेत्र में किए हुए विकास कार्य मौजूद है। वहीं भाजपा के पास अब तक किए गए विकास कार्य, योजनाएं मौजूद है जो मतदाताओं को अपनी उम्मीदवारों की ओर आकर्षित कर सकती है। जबकि विपक्षी गठबंधन के पास बुनियादी ढांचे से जुड़े हुए समस्याएं मुद्दों के रूप में मौजूद है।


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