– 23.31 करोड़ के गोल्ड लोन घोटाले में बैंक अधिकारी समेत 8 गिरफ्तार
नागपुर :- आईसीआईसीआई बैंक की गोल्ड लोन प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा कर नकली कर्जदारों के नाम पर करोड़ों रुपये का ऋण मंजूर कराने और नकली सोने के जेवरों को असली बताकर बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले गिरोह का आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने पर्दाफाश किया है। मामले में अब तक बैंक से जुड़े अधिकारियों और गोल्ड वैल्यूअर समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
धंतोली थाने में 30 मार्च 2026 को मामला दर्ज किया गया था। प्रारंभिक शिकायत में बैंक को 23 करोड़ 19 लाख 41 हजार 751 रुपये के नुकसान की बात सामने आई थी। जांच आगे बढ़ने पर धोखाधड़ी की कुल रकम 23 करोड़ 31 लाख 84 हजार 752 रुपये होने का खुलासा हुआ। ऑडिट के दौरान एक गोल्ड लोन खाते में गिरवी रखे गए सोने के जेवरों की शुद्धता पर ऑडिटर को संदेह हुआ। मामला गंभीर लगने पर बैंक की विभिन्न शाखाओं के गोल्ड लोन खातों का विस्तृत ऑडिट कराया गया, जिसके बाद फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं।
जांच के दौरान मनीष नगर, मेडिकल चौक, नरसाला, काटोल रोड, अजनी चौक, छत्रपति चौक, वर्धा रोड, प्रताप नगर और नंदनवन शाखाओं के गोल्ड लोन खातों की जांच की गई। पुलिस ने प्रत्येक खाते में यह पता लगाया कि ऋण किसके नाम पर मंजूर हुआ, गिरवी के तौर पर क्या दर्शाया गया, कर्ज की रकम किस खाते में जमा हुई और बाद में उसे किन खातों में स्थानांतरित किया गया। पुलिस ने ऋण की रकम के पूरे मनी ट्रेल को खंगाला। आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप, वाहन और बैंक लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। जांच टीम को फर्जी गोल्ड लोन ग्राहकों की सूची भी मिली, जिससे पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में मदद मिली।
बैंक अधिकारियों ने मुख्य आरोपी की मदद की
जांच के अनुसार, मुख्य आरोपी सचिन राऊत ने वर्ष 2018-19 में आईसीआईसीआई बैंक से अपने नाम पर गोल्ड लोन लिया था। इसके बाद उसने बैंक में अपनी साख बनाई। बैंक प्रबंधकों पर गोल्ड लोन का लक्ष्य पूरा करने का दबाव था, जिसका फायदा उठाकर राऊत ने अपने कबाड़ व्यवसाय में काम करने वाले मजदूरों और परिचितों के नाम पर गोल्ड लोन करवाना शुरू किया। पुलिस के मुताबिक, बैंक प्रबंधक पंकज केकतपुरे, दिनेश नागपुरे, आशीष वंजारी और उप प्रबंधक प्रकाश अवस्थी ने विभिन्न शाखाओं से गोल्ड लोन मंजूर कराने में राऊत की मदद की। गोल्ड लोन मंजूर होने के करीब तीन महीने बाद ऑडिट किया जाता था। जांच में प्रमोद टेटे, राजेंद्र शिलनकर और धनंजय ढोमने नामक ऑडिटरों की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि इन्हें नकली सोने के जेवरों को शुद्ध सोना बताने वाली रिपोर्ट तैयार करने के लिए भुगतान किया गया।
155 नकली गहनों का मूल्यांकन
जांच में सामने आया कि अप्रेजर/गोल्ड वैल्यूअर नंदू खरवड़े को आईसीआईसीआई बैंक की चार शाखाओं में नियुक्त किया गया था। आरोप है कि उसे अन्य शाखाओं में भी भेजकर नकली सोने के जेवरों का मूल्यांकन कराया गया। पुलिस के अनुसार, खरवड़े ने करीब 155 नकली सोने के जेवरों का मूल्यांकन किया। इसके बदले उसे प्रत्येक मूल्यांकन रिपोर्ट के लिए 5 हजार रुपये दिए जाने का आरोप है।
पुलिस का यह भी कहना है कि खरवड़े ने अपने परिचितों, दोस्तों और रिश्तेदारों समेत 38 फर्जी गोल्ड लोन ग्राहकों की व्यवस्था की थी। मामले में आर्थिक अपराध शाखा की जांच जारी है। पुलिस गोल्ड लोन घोटाले में शामिल अन्य लोगों और पूरे वित्तीय नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही है





