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जेल से बाहर आने के लिए फर्जीवाड़ा

– फर्जी दस्तावेज पर मांगी पैरोल, 40 कैदियों के खिलाफ केस

नागपुर :- जेल से बाहर आने के लिए कैदियों द्वारा बीमारी के फर्जी दस्तावेज बनाकर पैरोल अवकाश हासिल करने का प्रयास किए जाने का मामला सामने आया है. इस खुलासे के आधार पर धंतोली पुलिस ने 40 कैदियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इस कार्रवार्ड से कैदियों में खलबली मची हुई है. कैदियों के परिजनों की मृत्यु होने अथवा बीमारी के उपचार के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति दी जाती है. उसके लिए पैरोल अवकाश दिया जाता है. कैदी परिजन की बीमारी के दस्तावेज पेश करके पैरोल अवकाश हासिल करते हैं. जेल से बाहर आने का यह अधिकांश कैदी इस पर निर्भर रहते हैं. इस सुविधा का लाभउठाने के लिए कई कैदियों ने परिजनों के बीमार होने के फर्जी मेडिकल दस्तावेज बनाए. उन्हें जेल अधीक्षक कार्यालय में पेश करके पैरोल अवकाश के लिए आवेदन किया, अधीक्षक कार्यालय को भारी संख्या में आए इन आवेदनों पर संदेह हुआ. उसने संबंधित मेडिकल अधीक्षक को दस्तावेज जांच के लिए भेजे इसमें ४० दस्तावेजों को फर्जी पाया गया. इसके आधार पर जेल प्रशासन ने संबंधित कैदियों के पैरोल अवकाश को रद्द कर दिया. संबंधित कैदी न्यायालयीन बंदी होने से जेल अधिकारियों ने 7 अक्तूबर को उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके घटनाक्रम की जानकारी दी. उच्च न्यायालय के निर्देश पर धंतोली थाने में 40 कैदियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया.

अधिकांश कैदी नागपुर तथा पड़ोसी जिलों के निवासी हैं. फर्जीवाड़े में कैदियों के परिजन और साथियों के लिप्त होने का पता चला है. उन्होंने ही फर्जी मेडिकल दस्तावेज हासिल किए हैं. कैदियों तथा परिजनों से पूछताछ के बाद ही सच्चाई सामने आ सकती है. 40 कैदियों से पूछताछ करना ही सबसे बड़ी कवायद है. अदालत से अनुमति हासिल होने पर ही पूछ‌ताछ संभव है. बताया जाता है कि फर्जी मेडिकल दस्तावेज के आधार पर जेल से आने का खेल काफी पुराना है. कई कैदियों ने इसका लाभ उठाया है. हाल में नागपुर जेल काफी चर्चा में है. बीते दिने कैदियों के बीच गैंगवार के चलते मारपीट होने की कई घटनाएं हुई हैं.


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