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गजानन महाराज की पालकी पंढरपुर के लिए रवाना!

बुलढाणा :- संत एकनाथ महाराज ने इन पंक्तियों के जरिए पंढरपुर की वारी (तीर्थयात्रा) और वारकरियों के महत्व को बेहद खूबसूरती से बताया है। वारकरी संप्रदाय के लिए सबसे पवित्र माने जाने वाले पंढरपुर के आषाढी एकादशी यात्रा महोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। परंपरा के अनुसार, इस वर्ष भी श्रीसंत गजानन महाराज संस्थान की ओर से ‘माउली’ की पालकी ने 21 जून की सुबह ठीक 7 बजे पंढरपुर के लिए प्रस्थान किया। पालकी प्रस्थान के साथ ही पूरी शेगांव नगरी भक्ति के रंग में सराबोर हो गई है।

पंढरपुर के आषाढी एकादशी महोत्सव में शामिल होने का संस्थान का यह 57वां वर्ष है। इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पायी वारी (पैदल यात्रा) में लगभग 700 चुनिंदा वारकरी, टाळकरी, ध्वजधारी और सेवादारी शामिल हुए हैं। ‘जय हरी विठ्ठल…’ और ‘गण गण गणात बोते’ के अखंड जयघोष से पूरी संतनगरी गूंज उठी। मृदंग की थाप, टाळ की गूंज और हाथों में लहराती भगवा पताकाओं के बीच भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। श्री क्षेत्र नागझरी में महाप्रसाद वितरण के बाद पालकी अपने आगे के सफर के लिए रवाना हुई।

गजानन महाराज की यह पालकी शेगांव से पंढरपुर तक का लगभग 33 दिनों का सफर पैदल तय करेगी। यह यात्रा विदर्भ, मराठवाडा और पश्चिम महाराष्ट्र के विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों से होकर गुजरेगी। पालकी के रूट में मुख्य रूप से अकोला, रिसोड, नरसी, औंढा नागनाथ, परभणी, परली वैजनाथ, अंबाजोगाई, धाराशिव, तुलजापुर, सोलापुर और मंगळवेढा जैसे पवित्र स्थल शामिल हैं।

23 जुलाई को पंढरपुर में प्रवेश, 5 दिनों का मुकाम

यह पालकी आषाढ शुद्ध नवमी, यानी 23 जुलाई को श्रीक्षेत्र पंढरपुर पहुंचेगी। इसके बाद 23 से 28 जुलाई तक पालकी का मुकाम पंढरपुर में ही रहेगा, जहां श्रद्धालु भगवान विठ्ठल के दर्शन करेंगे। इस पूरे सफर के दौरान महाराष्ट्र के विभिन्न गांवों और शहरों में पालकी का भव्य और उत्स्फूर्त स्वागत किया जाएगा। रास्ते भर भक्तों के लिए हरिनाम सप्ताह, भजन-कीर्तन और कई धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया है।

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