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गरीबों की मेहनत पर डाका : मकान टैक्स घोटाले के खिलाफ उग्र आंदोलन की चेतावनी

– ग्राम पंचायतों में कर आतंक : बोकारा से धापेवाड़ा तक भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी

– करोड़ों के घोटाले की आशंका, जनता से कई गुना टैक्स वसूली

नागपुर :- जिला परिषद में चल रहे बोकारा मकान टैक्स घोटाले ने राजनीति में हलचल मचा दी है.. जिले की कई ग्राम पंचायतों में इसी तरह की घटनाएं हो चुकी हैं और इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि प्रशासन की लापरवाही के कारण उसे भी भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ रहा है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की जन्मभूमि में गरीबों की मेहनत का शोषण करने का मामला सामने आया है. धापेवाड़ा ग्राम पंचायत पर आम नागरिकों से अत्यधिक कर वसूलने के सनसनीखेज आरोपों के मद्देनजर, जिले में गृह कर के नाम पर हो रही भारी लूट को देखते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठ रही है.

सात साल पहले, तत्कालीन भाजपा जिला परिषद सदस्य रूपराव शिंगणे ने जिले में कर घोटाले को लेकर प्रशासन को चौंका दिया था. ग्रामसेवकों और सरपंचों के बीच इस तरह की मिलीभगत आम होती जा रही है और प्रशासन इस पर आंखें मूंद रहा है. इसके अलावा, बोकारा में हुआ मकान कर घोटाला भी काफी चर्चित हुआ था.

इस मामले को लेकर कई आरोप-प्रत्यारोप लगे हैं. हालांकि, चूंकि ऐसी घटना एक केंद्रीय मंत्री के गांव में हुई है, इसलिए यह एक बड़ा मुद्दा बन गया है और ऐसा लगता है कि अधिकारी किसी से नहीं डरते. ग्राम पंचायत प्रशासन द्वारा किए गए इस कथित घोटाले का तरीका अब सामने आ गया है. नागरिकों से सरकार द्वारा निर्धारित मूल्यांकन दर से कई गुना अधिक राशि वसूल की गई है. रसीद फाडक़र उन्हें खुलेआम लूटा गया है.

कर निर्धारण प्रति में उल्लेखित कर की राशि और नागरिकों को दी गई रसीद में भारी अंतर है. अनुमान लगाया जा रहा है कि यह आंकड़ा लाखों में नहीं, बल्कि करोड़ों में होगा. जिले की कई ग्राम पंचायतों में भी ऐसी ही स्थिति है. हालांकि, जिला परिषद कार्रवाई कर रही है और दोषियों को खुली छूट दे रही है. ग्रामीण अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कह रहे हैं, ‘नागरिक अपनी मेहनत की कमाई गांव के विकास में लगाते हैं. लेकिन यहां के भ्रष्टाचार ने उस मेहनत की कीमत को शून्य कर दिया है.’ यह सिर्फ पैसों की चोरी नहीं, बल्कि नागरिकों की अस्मिता के साथ विश्वासघात है.

जिला परिषद की भूमिका सवालों के घेरे में

इस तरह की घटनाएं जिले में बड़े पैमाने पर फैली हुई हैं और इस मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों से वसूली की मांग की जा रही है. इसके अलावा, सामाजिक कार्यकर्ता संदीप धकातेे ने चेतावनी दी है कि जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाती और उन्हें निलंबित नहीं किया जाता, तथा बढ़ा हुआ कर ब्याज सहित जनता को वापस नहीं किया जाता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा. यदि जिला प्रशासन इस पर ध्यान नहीं देता है, तो एक बड़ा जन आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन पर होगी.


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