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स्कूल बसों की लापरवाही पर हाईकोर्ट सख़्त, खुद लिया संज्ञान

– छात्रों की सुरक्षा से खिलवाड़ : दो साल से नहीं हुईं परिवहन समिति की बैठकें

– नियम तोड़े तो 50 हजार का जुर्माना, स्कूलों को हाईकोर्ट का अंतिम अल्टीमेटम

नागपुर :- स्कूल बसों में नियमों की अनदेखी और छात्रों की जान पर खतरे को देखते हुए हाई कोर्ट ने इस पर स्वयं संज्ञान लिया. याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्कूल बसों और वैन में यात्रा करने वाले छात्रों की सुरक्षा के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है. न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने स्कूलों द्वारा सुरक्षा नियमों और परिवहन समितियों की बैठकों की अनदेखी करने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की. अदालत मित्र के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता फिरदौस मिर्जा और राज्य सरकार की ओर से अधि. ठाकरे ने पैरवी की.

स्कूलों की लापरवाही पर कोर्ट की फटकार : अदालत ने कहा कि स्कूलों को छात्रों की सुरक्षा के प्रति अधिक गंभीर होना चाहिए क्योंकि स्कूल बसों और वैन में उनकी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने पिछले आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक स्कूल को हर 3 महीने में कम से कम एक बार परिवहन समिति की बैठक करना अनिवार्य है लेकिन अधिकांश स्कूलों ने पिछले 2 वर्षों में ऐसी बैठकों का कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया है. सुनवाई के दौरान एक स्कूल (प्रतिवादी क्रमांक 57) ने स्वीकार किया कि उनके यहां पिछले 2 वर्षों से कोई बैठक नहीं हुई जिस पर कोर्ट ने आश्चर्य और नाराजगी जताई.

हाई कोर्ट ने स्कूलों को अंतिम अवसर देते हुए निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई तक पिछले 2 वर्षों में हुई परिवहन समिति की बैठकों का चार्ट और परिवहन के लिए उपयोग की जा रही बसों व वैन की सूची अदालत में पेश करें. यदि कोई स्कूल इसमें विफल रहता है तो उसे 50,000 रुपये का जुर्माना अदालत में जमा करना होगा.

न्यायमूर्ति अनिल किल्लोर और राज वाकोडे की खंडपीठ ने कहा कि स्कूलों पर छात्रों की सुरक्षा की सर्वोच्च जिम्मेदारी होती है, लेकिन कई स्कूल सुरक्षा नियमों और परिवहन समितियों की बैठकों को लेकर पूरी तरह लापरवाह नजर आ रहे हैं। कोर्ट ने पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक स्कूल में हर तीन महीने में कम से कम एक बार परिवहन समिति की बैठक होना अनिवार्य है, लेकिन अधिकांश स्कूलों ने पिछले दो वर्षों में ऐसी किसी बैठक का कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया।

सुनवाई के दौरान एक स्कूल (प्रतिवादी क्रमांक 57) ने स्वीकार किया कि उसके यहां पिछले दो वर्षों से परिवहन समिति की कोई बैठक नहीं हुई। इस पर अदालत ने गहरी नाराजगी और आश्चर्य व्यक्त किया। हाईकोर्ट ने स्कूलों को अंतिम अवसर देते हुए निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक वे पिछले दो वर्षों में आयोजित परिवहन समिति की बैठकों का विवरण और परिवहन में उपयोग की जा रही बसों व वैन की पूरी सूची अदालत में पेश करें। आदेश का पालन नहीं करने पर संबंधित स्कूल को 50 हजार रुपये का जुर्माना भरना होगा। कोर्ट ने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ), नागपुर की कार्यप्रणाली पर भी असंतोष जताया। आरटीओ द्वारा प्रस्तुत की गई स्कूलों की सूची अधूरी पाए जाने पर निर्देश दिया गया कि अगली तारीख तक पूरी सूची जमा नहीं की गई तो आरटीओ को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा। इसके साथ ही महानगरपालिका को भी खराब हो चुके बस स्टॉप के संकेत बोर्ड बदलने और नए बोर्ड लगाने की समय-सीमा हलफनामे के जरिए बताने के आदेश दिए गए हैं।

हाईकोर्ट की सख़्ती के बाद स्कूल बसों में छात्रों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और स्कूल प्रबंधन पर दबाव बढ़ गया है।

अधूरी रिपोर्ट पर फटकार

आरटीओ और महानगरपालिका पर भी कोर्ट नाराज़, अधूरी रिपोर्ट पर फटकार लगाई. कोर्ट ने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, नागपुर की कार्यप्रणाली पर भी असंतोष जताया. आरटीओ द्वारा दी गई स्कूलों की सूची अधूरी पाई गई. कोर्ट ने आदेश दिया है कि यदि अगली तारीख तक सभी स्कूलों की पूरी सूची जमा नहीं की गई तो आरटीओ को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होना होगा. वहीं महानगरपालिका को भी आदेश दिया गया है कि वे खराब हो चुके बस स्टॉप के साइनेज (संकेत बोर्ड) को बदलने और नये बोर्ड लगाने के लिए एक निश्चित समय-सीमा हलफनामे के जरिए बताएं.


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