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डीसीपी के निर्देश दरकिनार! पांचपावली पुलिस ने जानलेवा हमले के पीड़ितों को बिना शिकायत लौटाया

 – आरोपियों को बचाने का आरोप, हत्या के प्रयास की धारा 109 गायब

– घायल परिवार का आरोप- पुलिस ने मामूली धाराओं में केस दर्ज कर हमलावरों को दी मदद

नागपुर :- पुरानी रंजिश के चलते एक परिवार पर जानलेवा हमला करने वाले आरोपियों के खिलाफ पुलिस उपायुक्त ने धारा 1०9 के तहत हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करने के निर्देश दिए थे. लेकिन, घायल अवस्था में थाने पहुंचने पर पांचपावली पुलिस ने पीडि़त परिवार को बिना कोई शिकायत दर्ज किए ही वापस उसे वापस भेज दिया. इतना ही नहीं, दर्ज अपराध की एफआईआर में मामूली धाराएं जोड़ दी गईं. पीडि़त परिवार का आरोप है कि शिकायतकर्ता के बयान पर गलत जानकारी के साथ हस्ताक्षर किए गए थे.

यह जानलेवा हमला पांचपावली के मस्कासाथ, संभाजीनगर, नितिन किराना इलाके में हुआ. 6 नवंबर 2०25 को रात करीब 1०.3० बजे दुकान के पास यह घटना हुई. विनोद उदाराम खडग़ी (52) निवासी. मस्कासाथ, संभाजीनगर, यह घायल पीडि़त शिकायतकर्ता का नाम है. आरोपियों के नाम बंटी हेडाऊ, सुनील हेडाऊ, वसंत हेडाऊ और अन्य सभी मस्कासाथ, संभाजीनगर निवासी हैं.

इस जानलेवा हमले में आरोपियों ने विनोद के घायल बेटे कृष (18) के सिर पर लोहे की रॉड से हमला किया और गला दबाकर जान से मारने की कोशिश की. इसी तरह उनकी बेटी कीर्ति (17) को भी रॉड और गंडासे से सिर पर वार कर घायल कर दिया गया.

इस संबंध में, पीडि़त परिवार ने पांचपावली पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ पुलिस आयुक्त से शिकायत की है. शिकायतकर्ता विनोद खडक़ी के अनुसार, पुलिस ने आरोपियों को बचाने के लिए हत्या के प्रयास की धारा 1०9 दर्ज करने से परहेज किया. इसके बजाय, आरोपियों को मदद पहुंचाने के लिए धारा 118(1), 351(2), 352, 3(5) के तहत मामला दर्ज किया और सभी आरोपियों को नोटिस जारी करके छोड़ दिया.

इतना ही नहीं, घायल परिवार के लोग घटना वाली रात ही सीधे पांचपावली थाने पहुंच गए. बिना पुलिस शिकायत के साथ ही, घायलों को समय पर पुलिस वाहन से इलाज के लिए अस्पताल भेजने के बजाय, उन्हें वापस उनके घर भेज दिया गया. अंतत: घायल परिवार के सदस्य स्वयं इलाज के लिए मेयो अस्पताल गए. इसके बाद पुलिस ने 14 नवंबर 2०25 को पीडि़त परिवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामूली मामला दर्ज किया. इसलिए, पीडि़त और शिकायतकर्ता विनोद उदाराम खडग़ी ने 19 नवंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पुलिस आयुक्त से मामले की जांच करने और न्याय दिलाने की मांग की. इस समय शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र कामगार सेना की उप जिला प्रमुख सारिका सोनकुसरे (निगोटे) और अन्य उपस्थित थे.

शिकायतकर्ता के बयान दर्ज करने में हेराफेरी?

पांचपावली पुलिस ने खुद को बचाने के लिए एफआईआर में दिए गए बयान में भी हेरफेर किया और झूठा दावा किया कि मैं 6 नवंबर को हुई घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने थाने नहीं आई क्योंकि मेरी और मेरे बच्चों की तबीयत ठीक नहीं थी, मैं आज 14 नवंबर को थाने आ रही हूं क्योंकि मैं बेहतर महसूस कर रही हू इसके अलावा, एफआईआर में यह भी दर्ज नहीं किया गया कि कोई घायल कहां हुआ था. शिवसेना नेता सारिका सोनकुसरे (निगोटे) ने आरोप लगाया कि मेयो अस्पताल द्वारा उपलब्ध कराए गए चिकित्सा उपचार के दस्तावेजों को देखने के बाद पुलिस ने बयान दर्ज करने से परहेज किया.

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