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गोरेवाड़ा जू में लाखों की ई-मिनी बस बनी भंगार, एक साल भी नहीं चली

– बैटरी का बहाना या लापरवाही? पर्यटकों के लिए खरीदी बस खड़ी-खड़ी जंग खा रही

– सफारी के नाम पर एसी बसों का बोझ, सस्ती कैंटर बस नदारद

नागपुर :- शहर के गोरेवाड़ा जू परिसर में एक बस बिना चले ही भंगार हो गई है। लाखों रुपये की बस को पर्यटकों के लिए एक साल भी नहीं चलाई। प्रशासन की लापरवाही कहें या उदासीन रवैया यह बस वर्तमान स्थिति में परिसर में एक कोने में धूल खा रही है। ऐसी स्थिति में प्रशासन की ओर से पैसों की बर्बादी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

बैटरी की समस्या बताकर नहीं चलाई : जंगल सफारी की सैर करना हर किसी को अच्छी लगती है, लेकिन नागपुर में उमरेड-करांडला, पेंच व्याघ्र प्रकल्प के अलावा कोई जंगल सफारी नहीं है। यह सफारी करना एक तो शहर से दूर जाना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर सफारी में पैसे भी बहुत ज्यादा खर्च होते हैं, लेकिन गत 3 साल पहले नागपुर के पास बालासाहेब ठाकरे अंतरर्राष्ट्रीय जू का निर्माण किया गया है। जहां पर कुल 4 सफारी का आनद पर्यटकों को केवल 3 सौ से 4 सौ रुपये में मिलता है। इनके लिए 5 एसी बसें व 2 नॉन एसी कैंटर हैं। इन बसों में एक ई मिनी बस भी ली गई थी। जिसकी कीमत लाखों में थी, लेकिन यह बस पर्यटकों के लिए चलाई ही नहीं गई। बैटरी की समस्या बताकर बस को खड़ी करके रखी गई है। जो कि अब भंगार बन गई है। बस के काले गहरे टायर व अंदर लगी सीट पर चढ़े प्लास्टिक कवर गवाही दे रहे हैं, कि बस को सालभर भी ठीक से नहीं चलाया गया है।बताया जा रहा है कि बस को खरीदने के बाद एक साल भी नियमित रूप से नहीं चलाया गया, और अब वह परिसर के एक कोने में धूल खा रही है।

जानकारी के अनुसार, इस बस को जंगल सफारी के लिए लाया गया था, ताकि पर्यटकों को कम खर्च में बेहतर सुविधा मिल सके। लेकिन बैटरी में समस्या का हवाला देकर बस को खड़ा कर दिया गया। समय पर मरम्मत और रखरखाव नहीं होने से अब उसकी हालत खराब हो चुकी है। बस के टायर और सीटों पर लगे प्लास्टिक कवर इस बात की गवाही दे रहे हैं कि वाहन का उपयोग बेहद कम हुआ है।

पर्यटकों का कहना है कि सफारी के लिए एसी बसों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे उन्हें अधिक किराया चुकाना पड़ता है। सस्ती कैंटर बस की उपलब्धता भी नियमित नहीं रहती। ऐसे में ई-मिनी बस का उपयोग न होना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों ने इस मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने तथा बस को शीघ्र दुरुस्त कर सेवा में लाने की मांग की है, ताकि सरकारी धन की बर्बादी रोकी जा सके और पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिल सके।

जू में संसाधनों की बर्बादी पर उठे सवाल

साथ केंटर बस भी जू के पास है, जिसका किराया एसी बस से कम है, लेकिन पर्यटकों ने बताया कि, केंटर बस परिसर में रखी ही नहीं जाती है। जिससे सबको एसी बसों पर निर्भर रहकर मोटा किराया देना पड़ रहा है। शनिवार को भी परिसर में केंटर बस नदारद थी। परिसर में खड़ी मिनी बस को 3 साल पहले लिया था, लेकिन बैटरी के कारण इस बस को नहीं चलाया है। वर्तमान में इसकी मरम्मत की ओर ध्यान दिया जा रहा है। जल्दी ही सुधारा जाएगा। केंटर बस थोड़ी मटमैली होने से इसे पेंट कर रहे हैं।


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