Home Latest News बड़े लेन-देन पर आयकर विभाग की नजर, 31 मई डेडलाइन

बड़े लेन-देन पर आयकर विभाग की नजर, 31 मई डेडलाइन

0
44

– एसएफटी फाइलिंग में चूक बढ़ा सकती है आईटीआर की मुश्किलें

नागपुर :-  नागपुर आयकर कैलेंडर पर एक शांत किंतु महत्वपूर्ण तारीख नजदीक आ रही है. 31 मई तक देश भर की निर्धारित संस्थाओं को बीते वित्तीय वर्ष के लिए वित्तीय लेन-देन का विवरण दाखिल करना होगा और इन फाइलिंगों की सटीकता ही तय करेगी कि आने वाले महीनों में लाखों करदाता अपने रिटर्न कितनी सहजता से पुरा कर पाते हैं. एसएफटी ढांचा, जो धारा 285बीए के साथ नियम 114ई में निधर्धारित है, कुछ निश्चित संस्थाओं से (बैंक और सहकारी बैंक, रजिस्ट्रार व उप-पंजीयक, म्यूचुअल फंड व सूचीबद्ध कंपनियां, स्टॉक एक्सचेंज, क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता, आरबीआई प्राधिकृत व्यक्ति, तथा धारा 44एबी के अंतर्गत लेखा परीक्षा केअधीन व्यवसाय) यह अपेक्षा करता है किवे निर्दिष्ट उच्च-मूल्य लेन-देन की सूचना आयकर विभाग को दें.

निर्धारित सीमा से अधिक नकद जमा व निकासी, तीस लाख रुपये से अधिक की अचल संपत्ति के लेन-देन, क्रेडिट कार्ड भुगतान, म्यूचुअल फंड व बॉन्ड में निवेश, विदेशी मुद्रा को विक्री तथा ऐसी कई श्रेणियाँ इसके दायरे में आती हैं. यह संरचना सोच समझकर बनाई गई है. हर करदाता से हर बड़े लेन-देन का खुलासा कराने के बजाय, कानून उन संस्थाओं को चिहिनत करता है जिनके माध्यम से ये लेन-देन स्वाभाविक रूप से होते हैं. करदाता दोहराव से बच जाता है; प्रणाली को पारदर्शिता मिलती है; और यह पुरा ढाँचा एक ही शर्त पर टिका है कि सूचना सटीक, पूर्ण और समय पर हो.

23,००० करोड़ की रिपोर्टिंग नहीं

बीते वर्ष की प्रतिक्रिया सुनियोजित रूप से स्तरबद्ध रही है, जिसमें प्रवर्तन से पहले संवाद को रखा गया, 2०25-26 के दौरान एसएफटी व संबंधित फाइलिंगों पर सैंतालीस से अधिक जन-संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनके साथ रिपोर्टिंग संस्थाओं को भेजे गए कई सौ ईमेल तथा हिंदी, मराठी व ओजी समाधान-पत्रों में जागरूकता अभियान भी चले.

आधार सीधा रहा कि अधिकांश गैर-अनुपालन मंशा के बजाय क्षमता का मामला है, और स्रोत पर निरंतर संवाद, बाद में लगाए गए दंड की तुलना में बेहतर डेटा देता है. जहां संवाद पर्याप्त नहीं रहा, वहां सत्यापन किया गया. 2०25-26 के दौरान बावन स्थल सत्यापन किए गए, चौतीस सरकारी रिपोर्टिंग संस्थाओं पर और अठारह निजी संस्थाओं पर निष्कर्ष शिक्षाप्रद रहे.

करदाता का दायित्व महत्वपूर्ण

करदाता का दायित्व अधिक सौम्य किंतु उतना ही महत्वपूर्ण है. एसएफटी हेटा आने के बाद यह आयकर पोर्टल पर एआईएस में प्रकट होता है. रिटर्न दाखिल करने से पहले प्रत्येका करदाता के लिए लाभकर होगा कि वह अपना एआईएस डाउनलोड करे और पुष्टि करें कि जो रिपोर्ट किया गया है वह उसकी जानकारी से मेल खाता है. जहां यह सही हो. वहां इस पर रिटर्न तैकर करने के लिए भरोसा किया जा सकता है. जहां यह सही न हो. वहां प्रत्येक प्रविष्टि में एक फीडबैंक विकल्य होता है जिससे सूचना को गलत, किसी अन्य पैन से संबंधित, या दोहराया गया बिहिनत किया जा सकता है. इस अर्थ में 31 मई महज एक समय-सीमा -सीमा से कहीं अधिक है. यह यह दिन है जब कई सी बैंक व सहकारी समितियाँ, प्रत्येक उप-पंजीयक कार्यालय, मयूचुअल फंड व स्टॉकएक्सचेज, तथा बड़ी संख्या में लेखा परीक्षित व्यवसाय मिलकर एक स्वच्चर, निर्वाध कर प्रशासन वर्ष की नींव रखते हैं.

विदर्भ में बड़े चूककर्ता

विदर्भ क्षेत्राधिकार में इस चुनौती का परिमाण स्पष्ट रूप से स्वीकार करने योग्य है, वर्ष 2०22-23 से 2०24-25 तक के तीन दितीय ज्यों में नागपुर प्रभार में फॉर्म 61० प्रस्तुतियों की त्रुटि दर एक प्रतिशत से भी कम से बढक़र इक्कीस प्रतिशत से अधिक हो गई है.

सुधार की आवश्यकता वाले अभिलेख कुछ सी से बढक़र एक ही वर्ष में पांच हजार से अधिक हो गए है. यह गिरावट ना चूककर्ताओं के बढ़ते आधार के कारण नहीं है.

दोषपूर्ण फाइलिंग करने वाली अलग-अलग संस्थाओं की संख्या में केवल मामूली वृद्धि हुई है, बार-चार चूक करने वालों का एक छोटा समूह, जो दो क्षेत्रों (उप-पंजीयक कार्यालयों व सहकारी बैंकों) में केंद्रित है, इस वृद्धि के बड़े हिस्से के लिए जिम्मेदार है.