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नागपुर के व्यवसायिक क्षेत्र में भिखारियों का बढ़ता जमावड़ा, नागरिक परेशान

– दान-दक्षिणा से बढ़ रही ‘पेशेवर’ भीख की प्रवृत्ति, समाधान की उठी मांग

– बाजारों में अव्यवस्था और गंदगी का मुद्दा, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

नागपुर :- आम दिनों में इस व्यवसायिक क्षेत्र में रात दिन बड़े पैमाने पर भिखारियों का तांता लगा रहता है, तथाकथित महिलाओं ने अपने बच्चों, बहनों, रिश्तेदारों समेत भीख का पेशा अपनाया हुआ है । इन भिखारियों के ग्रुप में से एक के बाद दूसरा भीख के लिए लोगों के सामने आ खड़ा होता है। लोगों द्वारा की जाने वाली दान दक्षिणा से भिखारियों की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। ये ढीठ, निर्लज्ज प्रवृत्ति के भिखारी उस अवसर की तलाश में रहते हैं जहां दो तीन लोग किसी मामले में चर्चा कर रहे होते हैं। उस चर्चा में में भिखारी व्यवधान डालने में अत्यधिक माहिर होते हैं ताकि चर्चा को जारी रखने वाले इन्हें कुछ दान दे दें । फिर दिन भर में भिखारी भीख मांग कर लोगों को परेशान करते रहते हैं। भीख में ये भिखारी सिर्फ नक़द रुपए पैसों की मांग करते हैं । ये भिखारी दिए गए भोजन, कपड़ों को खाली प्लाटों , नाले , रोड के किनारे फेंक देते हैं।

लोग हैं कि वे इन पेशेवर भिखारियों को रुपए, पैसे , भोजन और कपड़े सभी कुछ देते हैं लेकिन उन सफ़ेदपोश लोगों को अनदेखा करते हैं जो आवश्यकताओं के बावजूद अपने दुख दर्दो को उजागर नहीं करते और भीख मांगने की बजाय वे दुख दर्दो को सहते रहते हैं।

जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नागपूर के मीडिया सचिव डॉ एम ए रशीद ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए लोगों से अपील की है कि लोगों को चाहिए कि पेशेवर भिखारियों को दान दक्षिणा न देकर उन सफ़ेदपोश ज़रुरतमंदों का पता लगाएं जो वास्तव में दान दक्षिणा के मोहताज हैं । पेशेवर भिखारियों को दान दक्षिणा न देकर उन्हें किसी पारिश्रमिक से जोड़ा जाना चाहिए।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ समूहों में महिलाएं अपने बच्चों, बहनों और रिश्तेदारों के साथ भीख मांगते हुए नजर आती हैं। एक समूह के हटते ही दूसरा समूह लोगों के सामने आ खड़ा होता है। व्यापारियों का आरोप है कि ये लोग विशेष रूप से उन स्थानों को निशाना बनाते हैं जहां दो-तीन लोग किसी विषय पर चर्चा कर रहे होते हैं, और बीच में हस्तक्षेप कर दान की मांग करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई भिखारी केवल नकद रुपये की ही मांग करते हैं और भोजन या कपड़े दिए जाने पर उन्हें पास के खाली प्लॉट, नालों या सड़क किनारे फेंक देते हैं। इससे न केवल गंदगी फैलती है बल्कि स्वच्छता व्यवस्था पर भी असर पड़ता है। व्यापारी संघ के कुछ सदस्यों ने बताया कि लोगों द्वारा की जाने वाली दान-दक्षिणा के कारण भिखारियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। उनका मानना है कि संगठित रूप से भीख मांगने की प्रवृत्ति पर प्रशासन को ध्यान देने की आवश्यकता है।

नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि व्यवसायिक क्षेत्रों में नियमित गश्त बढ़ाई जाए और पुनर्वास की प्रभावी योजना लागू की जाए, ताकि जरूरतमंदों को उचित सहायता मिल सके और बाजार क्षेत्र में व्यवस्था बनी रहे।


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