– चंद्रयान-4 और लुपेक्स मिशन की तैयारियों पर डॉ. प्रकाश चौहान ने दी जानकारी
नागपुर :- सीएसआईआर-राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-नीरी) में 1 अक्टूबर को 85वां सीएसआईआर स्थापना दिवस मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी), इसरो, हैदराबाद के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएसआईआर-नीरी के निदेशक डॉ. एस. वेंकट मोहन ने की।
स्थापना दिवस व्याख्यान में डॉ. चौहान ने ‘भारतीय चंद्र अभियानों के साथ पृथ्वी के चंद्रमा की खोज’ विषय पर भारत की अंतरिक्ष यात्रा और भविष्य के अभियानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत शुरुआती अंतरिक्ष कार्यक्रम से आगे बढ़कर उन्नत चंद्र और ग्रहों के अभियानों वाला प्रमुख अंतरिक्ष राष्ट्र बन चुका है। डॉ. चौहान ने 1963 में स्थापित थुंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन से लेकर स्वदेशी प्रक्षेपण यानों, उपग्रहों और अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे तक भारत की प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने चंद्रयान-1 से चंद्रयान-3 तक की उपलब्धियों के साथ प्रस्तावित चंद्रयान-4 और चंद्रमा से नमूने पृथ्वी पर लाने की तकनीकी चुनौतियों की जानकारी दी।
उन्होंने चंद्रयान-5/लुपेक्स अभियान का भी उल्लेख किया, जो इसरो और जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जेएएक्सए का संयुक्त मिशन है। इसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र तथा स्थायी रूप से छायांकित क्षेत्रों में पानी समेत अन्य वाष्पशील पदार्थों का अध्ययन करना है। उन्होंने कहा कि भविष्य के अभियान चंद्रमा की उत्पत्ति, विकास, सतह और संसाधनों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। डॉ. एस. वेंकट मोहन ने सीएसआईआर-नीरी के जल, वायु गुणवत्ता, जलवायु परिवर्तन, अपशिष्ट प्रबंधन और कार्बन सर्कुलैरिटी जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर संस्थान के न्यूजलेटर और जलवायु-जनित आर्थिक एवं गैर-आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र क्षति एवं नुकसान संबंधी नीति संक्षेप का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में 25 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मानित किया गया।








